शहडोल।
जिले की ब्यौहारी तहसील अंतर्गत शासकीय माध्यमिक विद्यालय, जन शिक्षा केंद्र बरौघा से शिक्षा व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करने वाला बेहद शर्मनाक मामला सामने आया है। यहां पदस्थ सहायक शिक्षक रामखेलावन चौधरी पर आरोप है कि वे ड्यूटी के दौरान शराब के नशे में धुत होकर विद्यालय पहुंचे और स्कूल परिसर में अभद्रता व गाली-गलौज का हाई वोल्टेज ड्रामा करते रहे।
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घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें शिक्षक की हालत देखकर हर कोई हैरान है। वीडियो में साफ नजर आता है कि शिक्षक नशे में इतने चूर थे कि उन्हें अपने कपड़ों तक का होश नहीं था। उनकी पेंट की ज़िप खुली हुई थी और शर्ट की बटन तक नहीं लगी थी, इसके बावजूद वे खुद को शिक्षक बताते हुए खुलेआम गालियां दे रहे थे।
तहसीलदार और एसडीएम तक को दी गालियां
हैरानी की बात यह है कि नशे में धुत शिक्षक ने प्रशासनिक अधिकारियों की मर्यादा भी तार-तार कर दी। वीडियो में वे तहसीलदार और एसडीएम के नाम लेकर अपशब्द कहते हुए दिखाई दे रहे हैं। एक जिम्मेदार शिक्षक द्वारा इस तरह का व्यवहार न केवल अनुशासनहीनता है, बल्कि सरकारी सेवा नियमों का खुला उल्लंघन भी माना जा रहा है।
छात्रों और ग्रामीणों में आक्रोश
इस घटना से विद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों, अभिभावकों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि जिस शिक्षक पर बच्चों के भविष्य को संवारने की जिम्मेदारी है, वही अगर नशे में धुत होकर स्कूल पहुंचेगा तो छात्रों का भविष्य कैसे सुरक्षित रहेगा। ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग से कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
पहले भी लगते रहे हैं लापरवाही के आरोप
स्थानीय लोगों का दावा है कि संबंधित शिक्षक पर पहले भी ड्यूटी में लापरवाही और अनुशासनहीनता के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन हर बार मामला दबा दिया गया। अब वीडियो सामने आने के बाद विभाग की चुप्पी पर भी सवाल उठ रहे हैं।
शिक्षा विभाग की साख पर सवाल
यह पूरा मामला शासकीय विद्यालयों की निगरानी व्यवस्था और शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। यदि शिक्षक ही इस तरह के कृत्य करेंगे तो सरकारी स्कूलों की छवि और विश्वास दोनों को गहरा नुकसान पहुंचेगा।
कार्रवाई का इंतजार
अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जिला शिक्षा अधिकारी और प्रशासन इस मामले में क्या सख्त कदम उठाते हैं। क्या आरोपी शिक्षक के खिलाफ निलंबन और विभागीय जांच होगी या यह मामला भी समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा—यह देखना बाकी है।
यह घटना न केवल एक शिक्षक की व्यक्तिगत गलती है, बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था के लिए एक चेतावनी भी है, जिसे नजरअंदाज करना भविष्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।

