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टीकमगढ़: थाना दिगोड़ा के फरार आरोपियों की गिरफ्तारी पर पुलिस ने घोषित किया इनाम

संवाददाता: शहजाद वेग

टीकमगढ़, मध्य प्रदेश: टीकमगढ़ जिला पुलिस ने थाना दिगोड़ा में दर्ज अपराध क्रमांक 163/2024 (धारा 109 भादस तथा 74 आईटी एक्ट) में फरार चल रहे दो आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए इनाम की घोषणा की है। पुलिस अधीक्षक श्री आलोक कुमार ने इन आरोपियों पर अलग-अलग ₹2,000-₹2,000 का इनाम रखा है।

फरार आरोपी इस प्रकार हैं:

  1. भूपेंद्र भदौरिया, निवासी भोपाल।
  2. अनमोल घुरैया, निवासी मुरैना (कायमी)।

पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपी लंबे समय से फरार हैं और उनके खिलाफ सभी संभव प्रयास करने के बावजूद गिरफ्तारी नहीं हो सकी थी। अब ठोस सूचना देने या गिरफ्तारी कराने वाले व्यक्ति को प्रत्येक आरोपी पर अलग-अलग ₹2,000 का इनाम दिया जाएगा।

महत्वपूर्ण निर्देश:

  • सूचना देने वाले नागरिक की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।
  • विश्वसनीय सूचना पर कार्रवाई के बाद इनाम राशि पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा प्रदान की जाएगी।
  • इनाम वितरण में पुलिस अधीक्षक टीकमगढ़ का निर्णय अंतिम होगा।

जिला पुलिस ने आमजन से अपील की है कि फरार आरोपियों की किसी भी प्रकार की विश्वसनीय सूचना तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम या नजदीकी थाने में दें। इससे कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग मिलेगा।

धारा 109 भारतीय दंड संहिता (भादस) की व्याख्या

भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 109 दुष्प्रेरण (abetment) की सजा से संबंधित है। यह धारा तब लागू होती है जब कोई व्यक्ति किसी अपराध का दुष्प्रेरण करता है, और उस दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप वह अपराध वास्तव में हो जाता है, तथा उस दुष्प्रेरण के लिए संहिता में कोई अलग से स्पष्ट सजा का प्रावधान नहीं है।

धारा 109 का पूरा (हिंदी अनुवाद):

“जो कोई किसी अपराध का दुष्प्रेरण करता है, यदि दुष्प्रेरित कार्य दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप किया जाए और जहां कि उसके दण्ड के लिए इस संहिता द्वारा कोई स्पष्ट उपबंध नहीं किया गया है, तो वह उस अपराध के लिए उपबंधित दण्ड से दण्डित किया जाएगा।”

स्पष्टीकरण: कोई कार्य या अपराध दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप किया गया कहलाता है, जब वह उकसावे के परिणामस्वरूप, या षड्यंत्र के अनुसरण में, या दुष्प्रेरण गठित करने वाली सहायता से किया जाए।

मुख्य बिंदु:

  • दुष्प्रेरण क्या है? धारा 107 के अनुसार, दुष्प्रेरण तीन तरीकों से होता है:
    1. किसी कार्य को उकसाना (instigation)।
    2. षड्यंत्र में शामिल होना (conspiracy)।
    3. जानबूझकर सहायता करना (intentional aiding)।
  • धारा 109 कब लागू होती है?
    • दुष्प्रेरित अपराध वास्तव में पूरा हो जाना चाहिए।
    • उस अपराध के दुष्प्रेरण के लिए IPC में कोई अलग सजा का प्रावधान न हो (उदाहरण: कुछ अपराधों जैसे आत्महत्या के दुष्प्रेरण के लिए धारा 306 अलग है)।
  • सजा: दुष्प्रेरक को मुख्य अपराधी की तरह ही सजा मिलती है (जैसे यदि अपराध हत्या का है, तो सजा भी हत्या वाली)।

उदाहरण:

  • यदि A, B को किसी व्यक्ति की हत्या करने के लिए उकसाता है और B हत्या कर देता है, तो A को धारा 109 के तहत हत्या की सजा मिल सकती है।
  • यदि A किसी लोक सेवक को रिश्वत देने के लिए उकसाता है और वह रिश्वत ले लेता है, तो A दुष्प्रेरक है।

नोट: 1 जुलाई 2024 से भारतीय दंड संहिता की जगह भारतीय न्याय संहिता (BNS) लागू हो गई है, जिसमें पुरानी धारा 109 अब धारा 109 BNS के रूप में हत्या के प्रयास (attempt to murder) से संबंधित है (पुरानी IPC की धारा 307 के समान)। यदि आपका प्रश्न नई संहिता के संदर्भ में है, तो कृपया स्पष्ट करें। पुरानी खबर (2024 से पहले) में “धारा 109 भादस” पुरानी IPC की abetment वाली धारा को ही संदर्भित करती है।

धारा 107 भारतीय दंड संहिता (भादस) की विस्तृत व्याख्या

भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 107 “किसी बात का दुष्प्रेरण” (Abetment of a thing) से संबंधित है। यह धारा दुष्प्रेरण की परिभाषा देती है, अर्थात किसी व्यक्ति द्वारा किसी अपराध या कार्य को करने के लिए उकसाना, षड्यंत्र रचना या जानबूझकर सहायता करना। दुष्प्रेरण एक अलग अपराध है, जिसमें दुष्प्रेरक (abettor) मुख्य अपराधी नहीं होता, लेकिन वह अपराध को सुगम बनाता है।

धारा 107 का पूरा текст (हिंदी अनुवाद):

वह व्यक्ति किसी बात के किए जाने का दुष्प्रेरण करता है, जो—

  • पहला— उस बात को करने के लिए किसी व्यक्ति को उकसाता है; अथवा
  • दूसरा— उस बात को करने के लिए किसी षड्यंत्र में एक या अधिक अन्य व्यक्ति या व्यक्तियों के साथ सम्मिलित होता है, यदि उस षड्यंत्र के अनुसरण में कोई कार्य या अवैध लोप उस बात को करने के प्रयोजन से किया जाए; अथवा
  • तीसरा— साशय किसी कार्य या अवैध लोप द्वारा उस बात के किए जाने में सहायता करता है।

स्पष्टीकरण 1 (उकसाने के बारे में):

जो व्यक्ति जानबूझकर मिथ्या व्यपदेशन द्वारा, या किसी तात्विक तथ्य जिसे प्रकट करने के लिए वह बाध्य है उसके जानबूझकर छिपाने द्वारा, स्वेच्छया किसी बात का किया जाना कारित या उपाप्त करता है, या कारित या उपाप्त करने का प्रयत्न करता है, वह उस बात के किए जाने का उकसाने वाला कहा जाता है।

दृष्टांत: क, एक लोक अधिकारी, न्यायालय के वारंट द्वारा य को पकड़ने के लिए प्राधिकृत है। ख उस तथ्य को जानते हुए और यह भी जानते हुए कि ग, य नहीं है, क को जानबूझकर व्यपदेष्ट करता है कि ग, य है, और इस प्रकार साशय क से ग को पकड़वाता है। यहां ख उकसाने द्वारा ग के पकड़े जाने का दुष्प्रेरण करता है।

स्पष्टीकरण 2 (सहायता के बारे में):

जो कोई किसी कार्य के किए जाने के पूर्व या उसके किए जाने के समय, उस कार्य के किए जाने को सुकर बनाने के प्रयोजन से कुछ करता है, और इस प्रकार उस कार्य के किए जाने में सहायता करता है, वह उस कार्य के किए जाने में सहायता करने वाला कहा जाता है।

दुष्प्रेरण के तीन मुख्य तरीके:

  1. उकसाना (Instigation): शब्दों, इशारों या किसी माध्यम से किसी को अपराध करने के लिए प्रेरित करना। इसमें सक्रिय उत्तेजना जरूरी है; मात्र सलाह या सुझाव पर्याप्त नहीं।
  2. षड्यंत्र में सम्मिलित होना (Conspiracy): एक या अधिक व्यक्तियों के साथ अपराध करने की साजिश रचना, और साजिश के अनुसार कोई कार्य या लोप होना।
  3. साशय सहायता करना (Intentional Aiding): किसी कार्य या अवैध लोप (illegal omission) द्वारा अपराध को सुगम बनाना, जैसे हथियार प्रदान करना या जानकारी छिपाना।

आवश्यक तत्व (Essential Ingredients):

  • दुष्प्रेरक में अपराध करने की मंशा (mens rea) होनी चाहिए।
  • दुष्प्रेरण सक्रिय होना चाहिए; निष्क्रियता या मात्र उपस्थिति पर्याप्त नहीं।
  • दुष्प्रेरण और अपराध के बीच सीधा संबंध (nexus) होना जरूरी।

सजा:

धारा 107 स्वयं सजा नहीं निर्धारित करती; सजा धारा 109-120 के अंतर्गत मुख्य अपराध की सजा के समान या आधी होती है, यह इस पर निर्भर करता है कि अपराध हुआ या नहीं।

महत्वपूर्ण नोट (वर्तमान संदर्भ में):

1 जुलाई 2024 से भारतीय दंड संहिता की जगह भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 लागू हो गई है। पुरानी धारा 107 अब BNS की धारा 45 के रूप में है, जिसमें प्रावधान लगभग समान हैं (केवल शब्दावली में मामूली बदलाव)। यदि आपका प्रश्न नई संहिता के संदर्भ में है, तो धारा 45 लागू होगी।

यह धारा अपराध की जड़ों तक पहुंचने में मदद करती है, क्योंकि अक्सर मुख्य अपराधी के पीछे दुष्प्रेरक होते हैं।

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News Desk

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