जयपुर। राजस्थान में विधायक कोष (MLA LAD) से कामों की अनुशंसा के बदले कमीशन मांगने के आरोपों ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। मामले को गंभीर मानते हुए राज्य सरकार ने आरोपों में घिरे विधायकों के विधायक निधि खातों को फिलहाल फ्रीज कर दिया है। वहीं भारतीय जनता पार्टी ने खींवसर से विधायक रेवत राम डांगा को कारण बताओ नोटिस जारी किया है, जबकि कांग्रेस ने भरतपुर विधायक अनिता जाटव से भी जवाब तलब किया है।
सरकार ने इस पूरे मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। समिति की अध्यक्षता राज्य के मुख्य सतर्कता आयुक्त (अतिरिक्त मुख्य सचिव, गृह विभाग) करेंगे, जबकि इसमें मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को भी सदस्य बनाया गया है। समिति आरोपों की निष्पक्ष जांच कर रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।
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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि विधायक निधि में भ्रष्टाचार के आरोप बेहद गंभीर हैं और सरकार की नीति भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की है। दोषी पाए जाने पर किसी को भी नहीं बख्शा जाएगा, चाहे वह कितना ही प्रभावशाली क्यों न हो। मुख्यमंत्री के निर्देश पर ही संबंधित विधानसभा क्षेत्रों के विधायक निधि खाते सीज किए गए हैं।
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने नोटिस जारी करते हुए कहा कि विधायक कोष की राशि को लेकर रिश्वत के आरोप पार्टी अनुशासन का उल्लंघन हैं और विधायक डांगा को आरोपों पर स्पष्ट जवाब देना अनिवार्य है। वहीं कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी मामले को गंभीर बताते हुए उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है। डोटासरा ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को जनता की सेवा के लिए चुना जाता है, न कि सौदेबाजी और लूट के लिए।
इस प्रकरण पर नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि विधायक निधि जारी करने के बदले रिश्वत लेने का मामला लोकतंत्र और संघीय व्यवस्था पर बड़ा प्रहार है। बेनीवाल ने कहा कि एक ओर प्रधानमंत्री “न खाऊंगा, न खाने दूंगा” की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर ऐसे मामले सामने आना सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है।
हनुमान बेनीवाल ने सरकार से रेवत राम डांगा के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की और कहा कि ऐसे मामलों से लोकतंत्र की जड़ें कमजोर होती हैं। उन्होंने यह भी मांग की कि बीजेपी और कांग्रेस दोनों अपने-अपने आरोपित विधायकों को पार्टी से बर्खास्त करें, ताकि जनता का राजनीतिक दलों और व्यवस्था पर भरोसा बना रह सके।
फिलहाल पूरे मामले पर सरकार, जांच समिति और राजनीतिक दलों की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

