गोरखपुर में पुलिस ने एक ऐसे फर्जी आईएएस अधिकारी को गिरफ्तार किया है, जिसके कारनामे सुनकर हर कोई हैरान रह गया है। खुद को गौरव कुमार सिंह उर्फ ललित किशोर बताने वाला यह युवक बिहार के सीतामढ़ी का रहने वाला है, लेकिन पिछले कई वर्षों से आईएएस बनकर लोगों को बेवकूफ बना रहा था। उसके ठाठ, रुतबा और नेटवर्क को देखकर कई बार असली अधिकारी भी धोखा खा गए।
लालबत्ती वाली गाड़ी, गनर और पहुंच वालों के साथ उठना-बैठना
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ललित किशोर अपनी धोखाधड़ी को सच जैसा दिखाने के लिए किसी भी हद तक चला जाता था। वह लालबत्ती लगी एसयूवी में घूमता था, साथ में दो से चार गनर रखता था और स्थानीय बड़े नेताओं व अफसरों के बीच घुसकर ऐसा व्यवहार करता था कि हर कोई उसे असली आईएएस समझ ले।
उसका रुतबा इतना था कि कोई यह सोच भी नहीं पाता था कि वह असली आईएएस नहीं है।
असली SDM को जड़ दिए थे दो थप्पड़
उसकी सबसे चौंकाने वाली हरकत भागलपुर (बिहार) में सामने आई।
एक बार वह ‘निरीक्षण’ के नाम पर इलाके का दौरा कर रहा था, तभी एक असली एसडीएम की नज़र उस पर पड़ी। उन्हें शक हुआ और उन्होंने ललित से बैच नंबर तथा रैंक पूछ ली।
प्रश्न सुनते ही ललित गुस्से से आग-बबूला हो गया और उसने एसडीएम को लगातार दो थप्पड़ मार दिए।
सबसे हैरानी की बात यह रही कि
एसडीएम ने इसे असली आईएएस समझकर
किसी तरह का विरोध नहीं किया
न ही कहीं शिकायत दर्ज कराई
यही वह क्षण था जिसने ललित के फ़र्ज़ी रुतबे की वास्तविक ताकत दिखा दी।
चार गर्लफ्रेंड्स — तीन वर्तमान में प्रेग्नेंट
पुलिस पूछताछ में एक और बड़ा खुलासा हुआ।
ललित किशोर ने अपने ‘आईएएस स्टेटस’ का फायदा उठाकर चार गर्लफ्रेंड्स बना रखी थीं, जिनमें से तीन इस समय प्रेग्नेंट हैं।
वह उन्हें भी यही विश्वास दिलाता था कि वह एक हाई-प्रोफाइल अधिकारी है, दिल्ली और लखनऊ में पोस्टेड रहा है और बड़े-बड़े अधिकारियों व नेताओं से उसके संबंध हैं।
सोशल मीडिया पर बनाता था प्रभाव
ललित सोशल मीडिया पर फर्जी आईडी चलाकर अपनी लाइफस्टाइल को आईएएस की तरह दिखाता था।
सरकारी बैठकों जैसे फोटो
गाड़ी में लालबत्ती वाली तस्वीरें
गनर के साथ वीडियो
ये सब देखकर किसी को शक नहीं होता था।
गोरखपुर पुलिस क्यों हुई सतर्क?
गोरखपुर में भी वह लंबे समय से खुद को आईएएस बताकर घूम रहा था, लेकिन अचानक पुलिस को उसके व्यवहार पर शक हुआ और जांच शुरू की गई।
पहचान पत्र फर्जी
गाड़ी पर लगे स्टिकर फर्जी
गनर किराए पर
दस्तावेज नकली
जब उसके असली दस्तावेज निकाले गए, तो पूरा खेल सामने आ गया।
पुलिस भी हुई हैरान – “इतनी परतों वाला फर्जीवाड़ा पहली बार देखा”
जांच अधिकारियों के अनुसार,
“ललित किशोर ने जिस तरह पूरी सिस्टम का फायदा उठाकर खुद को आईएएस साबित किया, वह हैरान करने वाला है। उसके प्रभाव में कई बड़े अफसर तक आ चुके थे।”
गिरफ्तारी के बाद अब उस पर धोखाधड़ी, सरकारी पद का दुरुपयोग और जालसाजी की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
निष्कर्ष
ललित किशोर का मामला यह दिखाता है कि
एक सुसंगठित फर्जी पहचान, दिखावटी रुतबा और सोशल इंजीनियरिंग के बल पर कोई भी कितनी आसानी से सिस्टम को धोखा दे सकता है।
गोरखपुर पुलिस की सतर्कता ने समय रहते इस हाई-प्रोफाइल ठग का भंडाफोड़ कर दिया।

