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नवंबर में जीएसटी संग्रह मात्र 0.7% बढ़ा, 1.70 लाख करोड़ रुपये का कलेक्शन; एक साल का सबसे निचला स्तर

नई दिल्ली। माल एवं सेवा कर (GST) का मासिक संग्रह नवंबर 2025 में साल-दर-साल आधार पर सिर्फ 0.7 प्रतिशत की मामूली वृद्धि दर्ज करते हुए 1.70 लाख करोड़ रुपये रहा। यह पिछले एक साल का सबसे कम वृद्धि दर वाला महीना है। वित्त मंत्रालय द्वारा सोमवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी दी गई।

हालांकि कर दरों में व्यापक कटौती के बाद भी उपभोग (consumption) में सुधार का सिलसिला जारी है, लेकिन संग्रह में उम्मीद से कम तेजी इसका संकेत दे रही है कि अर्थव्यवस्था में अभी भी कुछ सुस्ती बरकरार है।

कर दरों में बड़े बदलाव की पृष्ठभूमि

सरकार ने 22 सितंबर 2025 से जीएसटी ढांचे को सरल बनाने के लिए बड़ा सुधार किया था। अब अधिकांश वस्तुओं एवं सेवाओं पर सिर्फ दो मुख्य कर दरें ही लागू हैं:

  • 5 प्रतिशत
  • 18 प्रतिशत

इसके अलावा विलासिता की वस्तुओं (luxury items) तथा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक उत्पादों (demerit goods जैसे तंबाकू, एरेटेड ड्रिंक्स आदि) पर 40 प्रतिशत की विशेष उच्च दर लागू की गई है। पहले 0%, 5%, 12%, 18% और 28% सहित कई स्लैब थे, जिन्हें कम करके मात्र दो मुख्य स्लैब कर दिया गया।

त्योहारी सीजन का असर अक्टूबर में दिखा, नवंबर में सुस्ती

इसी कर कटौती और त्योहारी मौसम (दशहरा-दिवाली) में जबरदस्त खरीदारी की वजह से अक्टूबर 2025 में जीएसटी संग्रह में उछाल देखने को मिला था। अक्टूबर का आंकड़ा अभी तक का दूसरा सबसे ऊंचा स्तर था। लेकिन नवंबर में त्योहार खत्म होने और सीजनल खरीदारी कम होने से संग्रह पर ब्रेक लग गया।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

विश्लेषकों का मानना है कि:

  • कर दरें कम होने से आम उपभोक्ता को राहत मिली है, जिससे खपत बढ़ रही है।
  • लेकिन राजस्व में मामूली वृद्धि यह भी दर्शाती है कि अर्थव्यवस्था अभी पूरी रफ्तार नहीं पकड़ पाई है।
  • ई-वे बिल और रिटर्न फाइलिंग के आंकड़े भी नवंबर में थोड़े सुस्त रहे।

सरकार का दावा है कि नया सरलीकृत जीएसटी ढांचा लंबे समय में अनुपालन बढ़ाएगा और राजस्व को स्थिरता देगा। दिसंबर में फिर त्योहारी सीजन (क्रिसमस-नया साल) की खरीदारी से संग्रह में सुधार की उम्मीद है।

फिलहाल नवंबर के 1.70 लाख करोड़ रुपये के संग्रह से चालू वित्त वर्ष के पहले 8 महीनों (अप्रैल-नवंबर 2025) का कुल जीएसटी संग्रह करीब 13.8 लाख करोड़ रुपये हो चुका है, जो पिछले साल की समान अवधि से अब भी बेहतर है, लेकिन वृद्धि दर धीमी पड़ती दिख रही है।

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News Desk

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