सन्त अनिरुद्धाचार्य क़े पावन सानिध्य में हजारों कृष्णप्रेमि पहुंचे तीर्थराज विमलकुण्ड कामवन धाम
रिपोर्टर मनमोहन गुप्ता कामां डीग
कामां – परम पूज्य सन्त अनिरुद्धाचार्य क़े पावन सानिध्य में हजारों कृष्णप्रेमियों ने किये विमल बिहारी व विमलकुण्ड क़े आचमन। सभी ने दीप जलाकर मोक्ष की कामना की। मन्दिर सेवाअधिकारी संजय लवानिया ने माहात्म्य सुनाते हुए बताया कि कामवन ब्रज का प्रसिद्ध तीर्थ भी है। इसका पौराणिक नाम काम्यकवन, कामवन था। ब्रज की चौरासी कोस परिक्रमा मार्ग में इस स्थान का अपना महत्त्व है।
इंद्र स्तुति करते हैं कि ब्रज में अति रमणीक स्थान हैं। उन में हम सभी जाने की इच्छा करते हैं पर जा नहीं सकते।
यह मधुपुरी ब्रज धन्य और वैकुण्ठ से भी श्रेष्ठ है, क्योंकि वैकुण्ठ में तो मनुष्य अपने पुरुषार्थ से पहुँच सकता है पर यहाँ श्रीकृष्ण की आज्ञा के बिना कोई एक क्षण भी नहीं ठहर सकता)
विमल कुण्ड सरोवर मात्र न होकर लोक-समाज के लिए आज भी तीर्थ स्थल है।
यहां यह लोक मान्यता है कि आप चाहे चारों धाम की तीर्थ-यात्रा कर आएं, यदि आप विमल कुण्ड में नहीं नहाये व विमल बिहारी जी के दर्शन नहीं किये तो आपकी तीर्थ-भावना अपूर्ण रहेगी।कामवन स्थित श्रीकृष्ण की क्रीड़ास्थलियों चरणपहाड़ी ,भोजनथाली ,भामासुर की गुफा ,खिसलनी शिला ,दाऊजी के चरण ,कठ्ला, मुकुट ,कामेश्वर महादेव,वृंदा देवी ,गोपीनाथ जी ,
चौरासी खंभा,पंचम पीठाधीश्वर श्री गोकुल चन्द्रमा जी ,सप्तम पीठाधीश्वर श्री मदनमोहन जी ,सेतुबंध रामेश्वर ,लंका व यशोदा ,गयाकुण्ड ,श्रीकुण्ड सहित अनेकों श्री कृष्ण की पावन व पुनीत लीला व क्रीड़ास्थलियों के दर्शन किये ।

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