अतुल्य भारत चेतना
ब्युरो चीफ हाकम सिंह रघुवंशी
नटेरन/विदिशा। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के चर्च वाली गली, बरेठ रोड स्थित सेवाकेंद्र में दीपावली मिलन कार्यक्रम का हर्षोल्लास से आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में सेवाकेंद्र की संचालिका ब्रह्माकुमारी रुक्मणी दीदी, रेखा दीदी, नंदनी दीदी और अनु दीदी सहित अन्य बहनों ने दीप प्रज्वलन कर शुभारंभ किया। दीपावली के पावन अवसर पर केंद्र में उपस्थित भक्तों और सदस्यों को आध्यात्मिक संदेश देते हुए रुक्मणी दीदी ने कहा, “घर की सफाई के साथ अंतरमन की सफाई भी जरूरी है। बाहर के अंधकार को मिट्टी के दीपक से दूर कर सकते हैं, लेकिन अंतर्मन के अंधकार को शुभ संकल्पों के दीप जलाकर ही मिटाया जा सकता है।” कार्यक्रम ने न केवल त्योहार की खुशियां बांटीं, बल्कि आत्मिक जागरण और सकारात्मक जीवनशैली पर गहन चिंतन को भी प्रेरित किया।
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दीपावली मिलन: आध्यात्मिक प्रकाश का उत्सव
दीपावली, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, ब्रह्माकुमारी संगठन में आध्यात्मिक उत्सव के रूप में मनाई जाती है। यह कार्यक्रम राज्य स्तर पर चल रहे ब्रह्माकुमारी के “दीपावली मिलन” अभियान का हिस्सा था, जिसमें विश्वभर के केंद्रों पर आत्मिक सफाई और ईश्वरीय ज्ञान पर फोकस किया जाता है। बरेठ सेवाकेंद्र में आयोजित इस एक दिवसीय कार्यक्रम में करीब 200 से अधिक सदस्यों ने भाग लिया। दीप प्रज्वलन के साथ शुरू हुए समारोह में भजन-कीर्तन, ध्यान सत्र और आध्यात्मिक प्रवचन हुए। बाल कलाकारों ने स्वागत नृत्य प्रस्तुत कर माहौल को और भी जीवंत बना दिया। नृत्य में दीपावली के प्रतीक—प्रकाश, समृद्धि और एकता—को रंगीन अंदाज में दर्शाया गया, जिसने उपस्थित सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

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रुक्मणी दीदी का प्रेरणादायक संदेश: आत्मा ही सच्चा दीपक
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता ब्रह्माकुमारी रुक्मणी दीदी ने दीपावली को आध्यात्मिक सफाई का अवसर बताते हुए कहा, “दीपावली के त्योहार में हम घर की सफाई तो करते हैं, लेकिन अंतर्मन की सफाई भूल जाते हैं। बाहर का अंधकार तो मिट्टी के दीपक से दूर होता है, लेकिन अंतर्मन में छाए अंधकार—जैसे काम, क्रोध और लोभ—को दूर करने के लिए शुभ संकल्पों के दीप जलाने होंगे।” उन्होंने आह्वान किया, “आओ, हम सभी सत्य परमात्मा से सत्य ज्ञान ग्रहण कर अपने जीवन को पावन बनाएं। अपनी आत्मज्योति जगाकर ईश्वरीय मिलन का वास्तविक सुख प्राप्त करें। ऐसे मनोपरिवर्तन से ही पृथ्वी पर स्वर्ग आएगा, जहां श्री लक्ष्मी और श्री नारायण का राज्य होगा।”
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रुक्मणी दीदी ने आगे चेतावनी दी कि “आत्मा ही सच्चा दीपक है, लेकिन विकारों के वशीभूत हो जाने से इसकी चमक मलिन हो गई है। लोगों का अंतर्मन विकारों के अधीन हो चुका है। ऐसे विकारी मनुष्यों के बीच श्री लक्ष्मी का शुभागमन कैसे संभव? यह विडंबना है कि अंतर्मन की सफाई के बजाय हम घर की सफाई से संतुष्ट हो जाते हैं।” उन्होंने सकारात्मक सोच पर जोर देते हुए कहा, “हमें हमेशा दूसरों के लिए अच्छा सोचना चाहिए। शुभ सोचेंगे तो लाभ होगा। इसलिए भारतीय संस्कृति में नए कार्यों पर ‘शुभ’ और ‘लाभ’ लिखते हैं, क्योंकि शुभ से लाभ जुड़ा है।” उनके संदेश ने उपस्थित सदस्यों को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित किया, और कई ने तत्काल शुभ संकल्प लेने का संकल्प जताया।
रेखा दीदी का आध्यात्मिक दृष्टिकोण: आत्मदीपक जगाकर मनाएं सच्ची दिवाली
ब्रह्माकुमारी रेखा दीदी ने अपने भावपूर्ण संदेश में कहा, “हमारे भारत देश के सभी पर्व आध्यात्मिक रहस्यों से भरे होते हैं। दीपावली भी जीवन से जुड़ी है, जो आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम है। समाज और राष्ट्र को इससे लाभ मिलना चाहिए। वास्तविक दीपक तो आत्मदीपक है, जो जगाने से ही सच्ची दिवाली मनाई जा सकती है।” उन्होंने स्पष्ट किया, “जीवन में काली अमावस्या की रात अज्ञानता का प्रतीक है। ईश्वरीय ज्ञान से यह अंधकार समाप्त होता है, और दैवी गुण—जैसे शांति, प्रेम और पवित्रता—जागृत होते हैं। ये गुण हमारी निजी संपत्ति हैं, लेकिन देह अभिमान में हम इन्हें भूल गए। अब आत्मदीपक जगाकर इनकी कमजोरी दूर करें।”
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रेखा दीदी ने दिवाली मनाने के नए तरीके सुझाए, “परम ज्योति शिव परमात्मा के ज्ञान प्रकाश से आत्मज्योति जागृत होगी। तब दिव्य गुणों से संपन्न श्री लक्ष्मी के लक्षण वाली स्वर्णिम दुनिया आएगी, और घर-घर खुशियों की दिवाली होगी। इस दीपावली पर नए सामान के साथ नए संस्कारों का सृजन करें।” उनके उद्बोधन ने प्रतिभागियों को आध्यात्मिक यात्रा पर चलने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने पर्वों को सामाजिक सद्भाव का माध्यम बताते हुए कहा कि इनसे न केवल व्यक्तिगत उन्नति होती है, बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी योगदान मिलता है।
अन्य बहनों का योगदान और बाल कलाकारों का स्वागत नृत्य
कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारी नंदनी दीदी और अनु दीदी ने भी आध्यात्मिक भजन और ध्यान सत्रों का संचालन किया। नंदनी दीदी ने ईश्वरीय मिलन के महत्व पर प्रकाश डाला, जबकि अनु दीदी ने दैनिक जीवन में शुभ संकल्प अपनाने के व्यावहारिक टिप्स दिए। कार्यक्रम की शुरुआत में बाल कलाकारों ने एक मनमोहक स्वागत नृत्य प्रस्तुत किया, जिसमें दीपावली के प्रतीकों—प्रकाशमय दीपक, लक्ष्मी पूजन और आत्मिक जागरण—को नृत्य के माध्यम से दर्शाया गया। यह नृत्य न केवल कार्यक्रम को रंगीन बनाया, बल्कि उपस्थित सभी को त्योहार की खुशियों से जोड़ दिया।

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प्रभाव और संदेश: आत्मिक दिवाली का संकल्प
यह दीपावली मिलन कार्यक्रम ब्रह्माकुमारी संगठन की वैश्विक पहल का हिस्सा था, जो 100 से अधिक देशों में फैले केंद्रों पर आयोजित हो रहा है। बरेठ सेवाकेंद्र के इस आयोजन ने स्थानीय समुदाय को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान की। प्रतिभागियों ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम जीवन को नई दिशा देते हैं। रुक्मणी दीदी ने समापन में आह्वान किया, “इस दीपावली पर आत्मिक सफाई का संकल्प लें। शुभ संकल्पों से जगाएं आत्मज्योति, ताकि स्वर्णिम दुनिया का निर्माण हो।”

