अतुल्य भारत चेतना
अखिल सुर्यवंशी
छिंदवाड़ा। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के सेंटर फॉर लर्निंग एंड डेवलपमेंट (CLD), रायपुर ने क्षेत्रीय कार्यालय छिंदवाड़ा के सहयोग से राष्ट्रीय कर्मयोगी कार्यक्रम का भव्य और सफल आयोजन किया। 13 से 15 अक्टूबर तक चले इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में क्षेत्र की विभिन्न शाखाओं और कार्यालयों से 100 से अधिक कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। मिशन कर्मयोगी—राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता निर्माण कार्यक्रम (NPCSCB)—के अनुरूप आयोजित यह प्रशिक्षण कर्मचारियों के दृष्टिकोण, कार्यक्षमता और नैतिक मूल्यों को मजबूत बनाने पर केंद्रित रहा, जो बैंक के मिशन को राष्ट्रीय विकास के साथ जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह आयोजन सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में चल रहे क्षमता निर्माण प्रयासों का हिस्सा है, जहां कर्मयोगी भावना को अपनाकर सेवा उत्कृष्टता को बढ़ावा दिया जा रहा है।
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कर्मयोगी कार्यक्रम का पृष्ठभूमि और उद्देश्य: सिविल सेवाओं के लिए राष्ट्रीय पहल
मिशन कर्मयोगी, जिसकी शुरुआत सितंबर 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई, सिविल सेवकों को भविष्योन्मुखी बनाने का एक व्यापक कार्यक्रम है। यह iGOT-कर्मयोगी डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से लगभग 46 लाख केंद्रीय कर्मचारियों को 2020-2025 तक कवर करने का लक्ष्य रखता है। कार्यक्रम का फोकस भूमिका-आधारित क्षमता निर्माण पर है, जिसमें नेतृत्व, टीम वर्क, नैतिकता और सेवा उत्कृष्टता जैसे विषय शामिल हैं। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में यह कार्यक्रम हाल ही में लागू किया गया है, जहां बैंक कर्मचारी महासंघ (BEFI) ने भी इसकी वैचारिक सामग्री पर चिंता जताई है, लेकिन बैंक इसे व्यावहारिक कौशल विकास के रूप में आगे बढ़ा रहा है।

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इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों के व्यक्तिगत लक्ष्यों को बैंक के मिशन और राष्ट्र निर्माण के अनुरूप ढालना था। CLD रायपुर के फैकल्टी रंजीत सूर्यवंशी ने संज्ञानात्मक परिवर्तन, नेतृत्व विकास, टीम भावना, नैतिक मूल्य और सेवा उत्कृष्टता पर केंद्रित संवादात्मक सत्र आयोजित किए। सत्रों में केस स्टडी, समूह चर्चाएं और आत्मचिंतन अभ्यास शामिल थे, जो प्रतिभागियों को कार्यस्थल पर तुरंत लागू करने योग्य कौशल प्रदान करने पर जोर देते थे। एक प्रतिभागी ने साझा किया, “इस प्रशिक्षण ने हमें न केवल प्रेरणा दी, बल्कि संगठन के प्रति जुड़ाव को भी मजबूत किया। अब हम ग्राहक सेवा को नई ऊर्जा के साथ संभालेंगे।”
सत्रों की संरचना: व्यावहारिक और प्रेरणादायक दृष्टिकोण
कार्यक्रम के तीन दिवसों में सत्रों को इस तरह डिजाइन किया गया कि वे कर्मयोगी के मूल सिद्धांतों—सहयोग, नवाचार और पारदर्शिता—को प्रतिबिंबित करें। पहले दिन संज्ञानात्मक परिवर्तन पर फोकस रहा, जहां केस स्टडी के माध्यम से कर्मचारियों ने चुनौतीपूर्ण बैंकिंग परिदृश्यों का विश्लेषण किया। दूसरे दिन नेतृत्व और टीम भावना पर समूह चर्चाओं ने जोर दिया, जिसमें प्रतिभागियों ने भूमिका निभाने वाले अभ्यास किए। तीसरे दिन नैतिकता और सेवा उत्कृष्टता पर आत्मचिंतन सत्रों ने कर्मचारियों को व्यक्तिगत मूल्यों का मूल्यांकन करने का अवसर दिया।
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रंजीत सूर्यवंशी ने बताया, “हमने iGOT प्लेटफॉर्म से प्रेरित होकर स्थानीय संदर्भों को शामिल किया, ताकि कर्मचारी डिजिटल बैंकिंग, ग्राहक संतुष्टि और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में सशक्त हों।” कार्यक्रम में डिजिटल टूल्स का उपयोग कर वर्कशॉप आयोजित किए गए, जो मिशन कर्मयोगी के डिजिटल लर्निंग के उद्देश्य से मेल खाते हैं। प्रतिभागियों ने फीडबैक सत्र में कहा कि इन गतिविधियों से उनकी कार्य प्रेरणा में वृद्धि हुई है, और वे अब ग्रामीण शाखाओं में वित्तीय समावेशन को मजबूत बनाने के लिए तैयार हैं।
समापन सत्र: सराहना और प्रतिबद्धता का संकल्प
समापन सत्र में क्षेत्रीय प्रमुख कुमार उत्कर्ष ने कार्यक्रम की सफलता पर प्रकाश डाला। उन्होंने क्षेत्रीय कार्यालय के कर्मचारियों के उत्कृष्ट समन्वय की सराहना की और विशेष रूप से मुख्य प्रबंधक संजय यादव, प्रबंधक अमोल तथा मानव संसाधन विभाग की सुश्री अंकित के योगदान को रेखांकित किया। कुमार उत्कर्ष ने कहा, “इनके सक्रिय प्रयासों से कार्यक्रम सुचारू रूप से संपन्न हुआ। CLD रायपुर के सहयोग के लिए हम आभारी हैं। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया कर्मयोगी भावना के माध्यम से सतत अधिगम, उत्कृष्टता और लोकसेवा की संस्कृति को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।” उन्होंने प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित करते हुए आह्वान किया कि वे सीखी गई बातों को शाखा स्तर पर लागू करें, जिससे बैंक की ग्राहक संतुष्टि दर में सुधार हो। समापन में एक संकल्प सत्र आयोजित किया गया, जहां सभी ने राष्ट्र निर्माण में बैंकिंग की भूमिका को मजबूत करने का वचन लिया।

प्रभाव और भविष्य की योजनाएं
यह कार्यक्रम छिंदवाड़ा क्षेत्र के लिए मील का पत्थर साबित हुआ, जहां सेंट्रल बैंक की 50 से अधिक शाखाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सक्रिय हैं। प्रतिभागियों ने साझा किया कि प्रशिक्षण से उनकी उद्देश्य भावना में नई ऊर्जा का संचार हुआ है, जो डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और वित्तीय समावेशन जैसे क्षेत्रों में सहायक होगा। बैंक प्रबंधन ने घोषणा की कि आने वाले महीनों में CLD रायपुर के साथ मिलकर और अधिक ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसमें iGOT प्लेटफॉर्म का एकीकरण होगा।
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सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, जो 1911 में स्थापित भारत का पहला स्वदेशी वाणिज्यिक बैंक है, ऐसे प्रयासों से अपनी लोकसेवी छवि को मजबूत कर रहा है। अधिक जानकारी के लिए बैंक की आधिकारिक वेबसाइट centralbankofindia.co.in या स्थानीय शाखा से संपर्क करें। यह आयोजन कर्मयोगी मिशन की सफलता का जीवंत उदाहरण है, जो भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में योगदान देगा।

