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Chhattisgarh news; रायपुर में राज्य स्तरीय परंपरागत वैद्य सम्मेलन संपन्न: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने की वैद्यों की सराहना, मंत्री रामविचार नेताम ने की पंजीयन और प्रमाण पत्र की घोषणा

अतुल्य भारत चेतना
प्रमोद कश्यप

रायपुर। छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड, रायपुर के तत्वावधान में आयोजित राज्य स्तरीय परंपरागत वैद्य सम्मेलन का भव्य समापन हुआ। इस सम्मेलन में राज्य के सभी जिलों से परंपरागत वैद्यों ने भाग लिया, जहां वैद्यों की प्राचीन ज्ञान परंपरा, आयुर्वेद और वनौषधियों के महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय थे, जबकि कृषि एवं आदिवासी विकास मंत्री रामविचार नेताम ने भी वैद्यों के कार्य की सराहना की। सम्मेलन ने वैद्यों को प्रोत्साहित करने और उनकी सेवाओं को मान्यता देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए, जिसमें वैद्यों के पंजीयन और प्रमाण पत्र प्रदान करने की घोषणा शामिल है।

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सम्मेलन का उद्देश्य और भागीदारी: राज्य भर से वैद्यों का जमावड़ा

छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा आयोजित इस राज्य स्तरीय सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य परंपरागत वैद्यों की ज्ञान परंपरा को संरक्षित करना और उन्हें आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली से जोड़ना था। सम्मेलन में राज्य के सभी जिलों से सैकड़ों परंपरागत वैद्यों ने हिस्सा लिया, जो जंगलों, पहाड़ों और ग्रामीण क्षेत्रों से वनौषधियां एकत्र कर मानव एवं पशुओं का इलाज करते हैं। वैद्यों ने अपने अनुभव साझा किए और वनौषधियों के माध्यम से विभिन्न रोगों के उपचार पर चर्चा की। बोर्ड के अधिकारियों ने बताया कि यह आयोजन वैद्यों को एक मंच प्रदान करने के लिए था, जहां वे अपनी चुनौतियों और योगदान पर विचार-विमर्श कर सकें।

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सम्मेलन का आयोजन रायपुर में किया गया, जहां वैद्यों ने प्रदर्शनी के माध्यम से विभिन्न जड़ी-बूटियां, छाल, पत्तियां, फूल और फलों से तैयार औषधियां प्रदर्शित कीं। यह आयोजन न केवल ज्ञान आदान-प्रदान का माध्यम बना, बल्कि वैद्यों की सेवाओं को सरकारी स्तर पर मान्यता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का उद्बोधन: वैद्यों को धन्यवाद, पूर्वजों की विरासत की सराहना

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वैद्यों की सराहना करते हुए कहा, “वैद्य हमारे पूर्वजों द्वारा प्राप्त आयुर्वेद चिकित्सा विज्ञान के माध्यम से पशु और मानव की सेवा वनौषधि से कर रहे हैं। इसके लिए वे धन्यवाद के पात्र हैं।” उन्होंने जोर दिया कि परंपरागत वैद्यों की ज्ञान परंपरा छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर है, जो आधुनिक चिकित्सा से पहले से ही लोगों की सेवा कर रही है। मुख्यमंत्री ने वैद्यों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि राज्य सरकार उनकी सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है, और वनौषधियों के संरक्षण के लिए विशेष योजनाएं बनाई जा रही हैं।

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मंत्री रामविचार नेताम की सराहना और घोषणाएं: रामायण का उदाहरण देकर वैद्यों का महत्व बताया

कृषि एवं आदिवासी विकास मंत्री रामविचार नेताम ने अपने उद्बोधन में वैद्यों के कार्य की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा, “वैद्य इस प्रकृति में पहाड़, नदी-नाले एवं पर्वत के उच्च शिखरों पर जाकर प्राकृतिक रूप से उगे पेड़-पौधे, लता के छाल, पत्ती एवं जड़ी-बूटी, फूल-फल से औषधि तैयार कर मानव एवं पशुओं की सेवा निस्वार्थ भाव से करते हैं, जो बड़े पुण्य का काम है। इनके इस कार्य को प्रोत्साहित करने की जरूरत है।”

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मंत्री ने रामायण का उदाहरण देते हुए वैद्यों के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “त्रेतायुग में भगवान श्री राम और रावण के बीच युद्ध के समय, मेघनाथ के शक्ति बाण से जब लक्ष्मण जी मूर्छित हुए थे, उस समय सुषेण वैद्य ने लक्ष्मण की मूर्छा को जड़ी-बूटी के उपचार से ही दूर किया। हनुमान जी ने उस वनौषधि को लाने का काम किया था।” उन्होंने आगे कहा कि आज भी पीलिया, लकवा, शुगर, बीपी, सर्दी-बुखार, हड्डी-जोड़ के दर्द के साथ ही कैंसर जैसे असाध्य रोगों का इलाज जड़ी-बूटियों से संभव हो रहा है। मंत्री ने वैद्यों के लिए महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं, जिसमें वैद्यों की प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत करना और आगे चलकर उनका पंजीयन कर प्रमाण पत्र प्रदान करना शामिल है। इस घोषणा पर सभी वैद्यों ने मंत्री महोदय का धन्यवाद ज्ञापित किया और इसे अपनी सेवाओं को मान्यता मिलने की दिशा में बड़ा कदम बताया।

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सम्मेलन का प्रभाव और भविष्य की योजनाएं

यह सम्मेलन छत्तीसगढ़ में परंपरागत चिकित्सा को बढ़ावा देने की दिशा में मील का पत्थर साबित हुआ। वैद्यों ने अपनी चुनौतियों पर चर्चा की, जैसे वनौषधियों का संरक्षण, जंगलों में पहुंच की समस्या और आधुनिक चिकित्सा से समन्वय। बोर्ड के अधिकारियों ने बताया कि भविष्य में ऐसे सम्मेलनों को नियमित रूप से आयोजित किया जाएगा, और वैद्यों को सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाएगा।

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News Desk

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