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श्रीरामलीला महोत्सव के दसवें दिन हुआ स्वरूपंखा की नाक काटना, खर-दूषण वध, सीता हरण और जटायू उद्धार का मंचन

अतुल्य भारत चेतना
मेहरबान अली कैरानवी

कैराना। श्रीरामलीला महोत्सव के दसवें दिन शनिवार को पंचवटी प्रसंगों का भव्य मंचन किया गया। इस दौरान स्वरूपंखा की नाक काटने, खर-दूषण वध, सीता हरण और जटायू उद्धार जैसे जीवंत दृश्य मंच पर प्रस्तुत हुए, जिन्हें देखकर दर्शक भावविभोर हो उठे। मंचन के दौरान जहां कलाकारों के दमदार अभिनय ने दर्शकों की वाहवाही लूटी, वहीं शानदार सीनरी और संगीत ने वातावरण को राममय बना दिया।

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दीप प्रज्वलन कर हुआ शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ भाजपा जिला महामंत्री दामोदर सैनी, संजीव जैन, अतुल मित्तल (मंडल अध्यक्ष) और मनोज मित्तल (शास्त्री स्वीट्स) ने दीप प्रज्वलित कर किया। लीला के आरंभिक दृश्य में दिखाया गया कि पंचवटी में शूर्पणखा भगवान राम व लक्ष्मण को अपनी ओर आकर्षित करने का प्रयास करती है, जिस पर क्रोधित होकर लक्ष्मण उसकी नाक काट देते हैं। अपमान का बदला लेने हेतु शूर्पणखा अपने भाई खर-दूषण और अन्य राक्षसों को युद्ध के लिए भेजती है, जहां श्रीराम अपने बाणों से उनका वध कर देते हैं।

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सीता हरण का मार्मिक दृश्य

खर-दूषण वध की सूचना रावण को मिलने पर वह समझ जाता है कि जिसने उनका वध किया है, वह नारायण के सिवा और कोई नहीं। वह छलपूर्वक माता सीता का हरण करने का विचार करता है। मंचन में मारीच को स्वर्णमृग का रूप धारण कर पंचवटी भेजने का दृश्य दर्शाया गया। स्वर्णमृग को देखकर माता सीता भगवान राम से उसे पकड़कर लाने की जिद करती हैं। राम मृग के पीछे वन में चले जाते हैं।
मारीच के वध के समय उसके मुख से “राम-राम” की आवाज निकलती है, जिसे सुनकर सीता व्याकुल हो उठती हैं और लक्ष्मण को राम की खोज में जाने को कहती हैं। कटु वचनों से व्यथित लक्ष्मण अंततः लक्ष्मण रेखा खींचकर वन की ओर चले जाते हैं।

इधर साधु वेश में आए रावण ने सीता से भिक्षा मांगी। लक्ष्मण रेखा पार करते ही रावण अपने असली रूप में आकर सीता का हरण कर लेता है। आकाश मार्ग से पुष्पक विमान द्वारा रावण जब सीता को लेकर जा रहा था, तभी मार्ग में जटायू ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। युद्ध में रावण ने जटायू के पंख काट दिए और उन्हें घायल कर दिया।

जटायू उद्धार का प्रसंग

मंचन में दिखाया गया कि सीता की खोज में निकले राम-लक्ष्मण जब घायल जटायू से मिलते हैं, तो जटायू उन्हें पूरी घटना सुनाता है। भगवान राम उसकी गोद में शरण पाकर प्राण त्यागने वाले जटायू का उद्धार करते हैं। इस मार्मिक दृश्य ने दर्शकों की आंखें नम कर दीं।

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कलाकारों का दमदार अभिनय

राम का अभिनय सतीश प्रजापति, लक्ष्मण का राकेश प्रजापति, सीता का शिवम गोयल, रावण का शगुन मित्तल एडवोकेट, मारीच का अनमोल शर्मा, खर का अभिषेक भारद्वाज, दूषण का सोनू कश्यप, स्वरूपंखा का पुनीत गोयल, मेघनाथ का आशीष सैनी और जटायू का अभिनय विराट नामदेव ने किया। सभी कलाकारों ने जीवंत अभिनय से दर्शकों का मन मोह लिया।
सीनरी डायरेक्टर सुनील कुमार टिल्लू ने पंचवटी की शानदार सीनरी तैयार की, जिसकी दर्शकों ने जमकर सराहना की।

बड़ी संख्या में उमड़े श्रद्धालु

रामलीला देखने के लिए शहर ही नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों से भी भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। पूरा मैदान जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा।

गणमान्य लोग रहे उपस्थित

इस अवसर पर रामलीला कमेटी के सचिव आलोक गर्ग, कोषाध्यक्ष संजू वर्मा, रोहित, प्रमोद गोयल, डॉ. रामकुमार गुप्ता, अतुल कुमार गर्ग, सुशील कुमार सिंघल, सभासद राकेश गर्ग, राकेश सिंघल, डिंपल अग्रवाल, डॉ. पंकज, पवन जैन, राकेश प्रजापति, राजेश नामदेव, पुनीत कुमार गोयल, अभिषेक भारद्वाज, मनोज कुमार मित्तल, सोनू नेता, अभिषेक गोयल, विजय नारायण, अनिल गोयल, अमन गोयल, सुशील सिंघल सहित अनेक गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

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सुरक्षा और व्यवस्थाएं

कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए चौकी प्रभारी किला गेट विनोद कुमार राघव के नेतृत्व में भारी पुलिस बल तैनात रहा। वहीं, नगर पालिका की ओर से विशेष सफाई, कली चुने और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था कराई गई।

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News Desk

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