अतुल्य भारत चेतना
रईस
काठमांडू। नेपाल ने अपने राजनीतिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा है। देश की पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल ने शुक्रवार को अंतरिम प्रधानमंत्री नियुक्त किया। कार्की नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी हैं। उन्हें संविधान के अनुच्छेद 61 के तहत यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। कार्की का कार्यकाल अंतरिम स्वरूप का होगा और उनका मुख्य दायित्व आगामी छह महीने के भीतर आम चुनाव कराना है।
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हाल ही में हुए ज़बरदस्त जनआंदोलन और राजनीतिक संकट के बाद संसद को भंग कर दिया गया था, जिससे स्थायी सरकार का गठन असंभव हो गया था।
पिछले कुछ महीनों से नेपाल में “ज़ेन जी आंदोलन” के तहत बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। इस आंदोलन ने भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी और पुरानी राजनीतिक पार्टियों की नाकामी के खिलाफ आवाज़ उठाई। आंदोलन हिंसक हो गया जिसमें दर्जनों लोगों की मौत और हज़ारों घायल हुए। इसी उथल-पुथल के बीच तत्कालीन सरकार को इस्तीफ़ा देना पड़ा और अंतरिम नेतृत्व की ज़रूरत महसूस हुई। सुशीला कार्की वर्ष 2016 में नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बनी थीं।
अपने न्यायिक कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण निर्णय दिए और भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। उनकी निष्पक्ष छवि और सख्त स्वभाव के कारण ही उन्हें इस संवेदनशील समय में देश की बागडोर सौंपी गई है। अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में कार्की के सामने कई गंभीर चुनौतियाँ हैं। देश में कानून व्यवस्था बहाल करना और हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों में शांति स्थापित करना। जेल से फरार हुए हज़ारों कैदियों को पकड़ना।जनता का भरोसा जीतते हुए पारदर्शी चुनाव कराना।
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प्रमुख राजनीतिक दलों और आंदोलनकारी युवाओं के बीच संतुलन बनाए रखना। नेपाल की मौजूदा स्थिति पर भारत, चीन और पश्चिमी देशों की कड़ी नजर है। राजनीतिक स्थिरता न केवल नेपाल के लोकतंत्र के लिए, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की सुरक्षा और सहयोग के लिए अहम मानी जा रही है।

