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Vidisha news; कमल पुष्प जीवन का प्रतीक है— कीचड़ में रहकर भी शुद्ध और पवित्र बने रहना : ब्रह्माकुमारी रुक्मिणी दीदी

अतुल्य भारत चेतना
ब्युरो चीफ हाकम सिंह रघुवंशी

विदिशा। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, चर्च वाली गली, बरेठ रोड स्थित सेवाकेंद्र पर आयोजित आध्यात्मिक प्रवचन में ब्रह्माकुमारी रुक्मिणी दीदी ने गणेशोत्सव के अवसर पर श्री गणेश जी के जन्म और उनके स्वरूप के गहन आध्यात्मिक अर्थ को समझाया। उन्होंने कहा कि पौराणिक कथा के अनुसार जब भगवान शंकर ने माँ पार्वती द्वारा रक्षित बालक का सिर काटकर उसके स्थान पर हाथी का सिर लगाया, तो उसका आध्यात्मिक अर्थ है कि परमपिता परमेश्वर हमारे अहंकार रूपी सिर को समाप्त कर ज्ञान रूपी सिर प्रदान करते हैं। यही ज्ञान हमें जीवन में बाधाओं को पार कर ‘विघ्नविनाशक’ बनने की शक्ति देता है।

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श्री गणेश के प्रतीकों का आध्यात्मिक महत्व

रुक्मिणी दीदी ने श्री गणेश जी के स्वरूप के प्रत्येक अंग और आभूषण के गहरे अर्थ समझाए—

  • विशाल माथा : ज्ञान और विवेक का प्रतीक।
  • चौड़े कान : छलनी की तरह, केवल सकारात्मक बातें ग्रहण करने का संकेत।
  • छोटी आंखें : दूरदर्शिता का प्रतीक, भविष्य के परिणाम को पहले देख लेना।
  • छोटा मुख : कम बोलना और वचनों को आशीर्वादमय बनाना।
  • एक दांत : द्वंद्व (सुख-दुख, पसंद-नापसंद) से ऊपर उठकर संतोष और शांति का जीवन जीना।
  • बड़ा पेट : सहनशीलता और समायोजन की शक्ति।

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  • हाथों में कुल्हाड़ी, रस्सी और कमल :
    • कुल्हाड़ी—नकारात्मक आदतों को काटने की शक्ति।
    • रस्सी—अनुशासन में बंधे रहने का संदेश।
    • कमल—कीचड़ में रहकर भी शुद्ध और पवित्र बने रहने का प्रतीक।
  • आशीर्वाद की मुद्रा : हर परिस्थिति में दूसरों के लिए शुभ विचार रखना।
  • मोदक : परिश्रम से सफलता प्राप्त करना, परंतु उसका श्रेय न लेना। यह एकता और सहयोग का भी प्रतीक है।
  • चूहा : विकारों और वासनाओं पर विजय का संदेश। जिस प्रकार चूहा छोटे से छेद से घर में प्रवेश कर लेता है, उसी तरह विकार भी असावधान आत्मा में प्रवेश कर जाते हैं।

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जीवन में लागू करने का संदेश

ब्रह्माकुमारी रुक्मिणी दीदी ने कहा—
“जब हम श्री गणेश जी के गुणों को अपने विचार, वचन और कर्म में आत्मसात कर लेते हैं, तब जीवन की बाधाएं स्वतः समाप्त हो जाती हैं। पवित्रता, शांति और समृद्धि हमारे जीवन में स्थायी रूप से स्थापित हो जाती है। कमल पुष्प की तरह हमें भी संसार रूपी कीचड़ में रहते हुए शुद्ध और पवित्र बने रहना है।” प्रवचन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और दिव्य वातावरण में गणेशोत्सव का आध्यात्मिक महत्व समझकर लाभान्वित हुए।

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News Desk

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