किसानों को भारी नुकसान, बीमा सुविधा न मिलने से बढ़ी चिंता
अतुल्य भारत चेतना
मेहरबान अली कैरानवी
कैराना। क्षेत्र में लगातार हो रही तेज बारिश और हवाओं ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। धान की फसल जो पककर तैयार होने की कगार पर थी, वह मौसम की मार से पूरी तरह नष्ट हो गई। किसानों का कहना है कि इस बार की बारिश और तूफ़ानी हवाओं ने वर्षों की मेहनत और उम्मीदों को तहस-नहस कर दिया।
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खेतों में बर्बादी का मंजर
गाँव बिडोली सादात के किसान अयूब पुत्र महमूद की लगभग 17 बीघा धान की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई। खेतों में धान की बालियाँ कटने से पहले ही जमीन पर गिर गईं और लगातार बरसात से सड़ने लगीं। किसानों का कहना है कि कई खेतों में तो पानी भर गया है, जिससे फसल का बचना नामुमकिन हो गया है।
खर्च पर पानी, मेहनत बेकार
किसानों ने बताया कि एक एकड़ धान की खेती तैयार करने में कम से कम ₹4,000 मजदूरी पर और लगभग ₹10,000 कीटनाशक दवाइयों पर खर्च होता है। इसके अलावा जुताई-बुवाई, खाद, डीजल और सिंचाई पर भी भारी खर्च करना पड़ता है।
फसल तैयार होने पर कटाई के लिए हार्वेस्टर मशीन से ₹3,500 प्रति एकड़ का खर्च देना पड़ता है। इतने खर्च के बाद जब पूरी मेहनत मौसम की मार से चौपट हो जाती है तो किसान पूरी तरह टूट जाता है।
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बीमा का सहारा भी नहीं
किसानों की सबसे बड़ी पीड़ा यह है कि उनकी फसलों पर कोई ठोस बीमा सुरक्षा नहीं है। बीमा कंपनियों से उन्हें कोई वास्तविक मदद नहीं मिल रही। किसानों ने कहा कि अगर बीमा कवर ठीक से होता तो नुकसान की भरपाई हो जाती, परंतु स्थिति यह है कि किसान केवल भगवान भरोसे बैठ जाता है।
किसानो में निराशा
लगातार बारिश से प्रभावित किसान गहरी निराशा में हैं। उनका कहना है कि वे पूरे साल दिन-रात मेहनत करके फसल तैयार करते हैं, लेकिन समय पर प्राकृतिक आपदा सब कुछ छीन लेती है। अब वे अगली फसल बोने को लेकर भी दुविधा में हैं क्योंकि पिछली लागत भी पूरी तरह डूब गई है।
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प्रशासन से मदद की उम्मीद
ग्रामीण किसानों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि नुकसान का सर्वे कराकर उचित मुआवजा दिया जाए, ताकि वे अगली फसल बोने की हिम्मत जुटा सकें।

