लगातार बढ़ते जलस्तर से कई बीघा कृषि भूमि हुई प्रभावित, किसानों को भारी नुकसान
अतुल्य भारत चेतना
मेहरबान अली कैरानवी
म्यान/शीतलगढ़ी। लगातार हो रही बारिश और हथिनी कुंड बैराज से छोड़े गए पानी के कारण यमुना का जलस्तर बढ़ गया है। बढ़ते जलस्तर ने यमुना किनारे स्थित गांवों की कृषि भूमि को बुरी तरह प्रभावित किया है। कई किसानों की तैयार फसलें नदी की धारा में समा गईं, जिससे ग्रामीण किसान गहरे संकट में आ गए हैं।
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किसानों की फसलें जलमग्न
स्थानीय किसानों ने बताया कि नदी की तेज धारा से भूमि कटान तेज हो गया है।
- नकली (पुत्र रोडा) की करीब 10 बीघा गन्ने की फसल यमुना में बह गई।
- बृजपाल (पुत्र बदलू, गांव शीतलगढ़ी) की 5 बीघा गोभी की फसल नदी में समा गई।
- शिवकुमार (पुत्र विष्णु) की 5 बीघा लौकी और 5 बीघा धान की फसल भी नदी की धारा में बह गई।
- सोना देवी व रामफल की 5 बीघा लौकी की खेती (रखवा नंबर 10-11 व 72-73, शीतलगढ़ी) पूरी तरह से प्रभावित हो गई।
ग्रामीणों ने बताया कि अब तक कई बार हथिनी कुंड बैराज से पानी छोड़ा जा चुका है, जिससे हर बार फसलों और जमीन को नुकसान झेलना पड़ रहा है।
भूमि कटान बनी बड़ी समस्या
किसानों का कहना है कि यमुना किनारे की उपजाऊ जमीन धीरे-धीरे नदी में कटकर समा रही है। उनका आरोप है कि जब पानी कम होता है, तब कटान और तेज हो जाता है क्योंकि नदी की धारा नीचे से मिट्टी काट ले जाती है। अबकी बार 2-3 बार पानी छोड़े जाने के बाद भूमि कटान और तेज हो गया है।
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किसानों की चिंता बढ़ी
किसानों ने कहा कि जैसे ही हथिनी कुंड बैराज से पानी छोड़ा जाता है, उनकी चिंता बढ़ जाती है। अधिकांश खेती यमुना किनारे ही होती है, इसलिए हर बार पानी आने पर फसलें और जमीन नदी में समा जाती हैं। इससे किसानों की मेहनत और पूंजी दोनों बर्बाद हो रही हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि कटान रोकने के लिए पुख्ता व्यवस्था की जाए ताकि किसानों को बार-बार हो रहे नुकसान से राहत मिल सके।

