अतुल्य भारत चेतना
प्रमोद कश्यप
रतनपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक नगरी रतनपुर में बुधवार, 13 अगस्त 2025 को हल षष्ठी, जिसे स्थानीय रूप से कमरछठ के नाम से जाना जाता है, बड़े ही श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया गया। यह पर्व संतान की सुख-समृद्धि और दीर्घायु की कामना के साथ-साथ भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। नगर के सभी मोहल्लों में माताओं ने व्रत रखकर भगवान शिव, माता पार्वती, और हल षष्ठी देवी की पूजा-अर्चना की, जिससे रतनपुर का माहौल भक्ति और आध्यात्मिकता से सराबोर हो गया।
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हल षष्ठी (कमरछठ) पर्व का महत्व
भारत तीज-त्योहारों का देश है, जो मनुष्य को सद्भावना, शांति, और ईश्वर के प्रति श्रद्धा से जीने की प्रेरणा देते हैं। हल षष्ठी, जिसे छत्तीसगढ़ में कमरछठ के नाम से जाना जाता है, एक ऐसा पर्व है जो माताओं को अपनी संतानों के लिए सुख, समृद्धि, और लंबी आयु की प्रार्थना करने का अवसर प्रदान करता है। यह पर्व भगवान बलराम के जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है, जिन्हें हलधर के नाम से जाना जाता है, क्योंकि उनका प्रमुख शस्त्र हल है। यह पर्व मनुष्य को देवत्व की ओर बढ़ने और आध्यात्मिकता के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
पूजा और व्रत की विधि
रतनपुर में माताओं ने इस पर्व को परंपरागत तरीके से मनाया। हल षष्ठी व्रत के विशेष नियम के अनुसार, माताओं ने बिना हल चली भूमि में उगे पसहर चावल और छह प्रकार की स्थानीय भाजियों से तैयार भोजन को भोग-प्रसाद के रूप में ग्रहण किया। पूजा में भैंस के दूध, दही, और घी का उपयोग किया गया, क्योंकि गाय के दूध और हल से जोती गई फसलों का सेवन इस व्रत में वर्जित माना जाता है। पूजा स्थल पर सागर स्वरूप सगरी का निर्माण किया गया, जहां माताओं ने हल षष्ठी देवी, भगवान शिव, और माता पार्वती की पूजा की। पूजा के बाद कथा श्रवण किया गया और माताओं ने अपनी संतानों के पीठ पर छह बार पोता मारकर उनके दीर्घायु होने का आशीर्वाद दिया।

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नगर में उत्साह और आस्था का माहौल
रतनपुर के विभिन्न मोहल्लों में यह पर्व बड़े उत्साह और आस्था के साथ मनाया गया। महामाया पारा में पंडित विनोद पाठक, करैहापारा में पंडित गजेश तिवारी, और अन्य मोहल्लों में विभिन्न आचार्यों ने हल षष्ठी देवी की पूजा संपन्न कराई। पूजा के बाद माताओं ने व्रत का पारण किया। नगर के हर कोने में भक्ति और श्रद्धा का माहौल देखा गया, और माताओं ने अपनी संतानों के उज्ज्वल भविष्य और लंबी आयु की कामना की।
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सामुदायिक और सांस्कृतिक प्रभाव
हल षष्ठी (कमरछठ) का यह पर्व रतनपुर में सामुदायिक एकता और सांस्कृतिक परंपराओं को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर बना। स्थानीय निवासी और माता राधा बाई ने कहा, “यह पर्व हमें अपनी संतानों के लिए प्रार्थना करने और भगवान बलराम, शिव, और पार्वती के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर देता है।” एक अन्य निवासी, शांति देवी, ने कहा, “कमरछठ का व्रत और पूजा हमें अपनी परंपराओं से जोड़ता है और बच्चों के लिए आशीर्वाद मांगने का एक पवित्र मौका प्रदान करता है।”
परंपराओं का संरक्षण
रतनपुर में हल षष्ठी (कमरछठ) का आयोजन छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं का प्रतीक है। इस पर्व ने न केवल माताओं को अपनी संतानों के लिए प्रार्थना करने का अवसर दिया, बल्कि यह सामुदायिक एकता और आध्यात्मिकता को बढ़ावा देने में भी सफल रहा। पूजा स्थलों पर सगरी निर्माण, कथा श्रवण, और पारंपरिक भोजन की प्रथा ने इस पर्व को और अधिक विशेष बनाया।
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रतनपुर में हल षष्ठी (कमरछठ) का यह पर्व आस्था, श्रद्धा, और परंपराओं के साथ मनाया गया, जिसने नगर के माहौल को भक्ति और देशभक्ति के रंग में रंग दिया। यह आयोजन माताओं की संतानों के प्रति प्रेम और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना का एक सुंदर उदाहरण बना।

