अतुल्य भारत चेतना
ब्युरो चीफ हाकम सिंह रघुवंशी
सागर। 22 जून 2025 को डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय, सागर में 33वां दीक्षांत समारोह गौर प्रांगण में भव्य रूप से आयोजित किया गया। इस अवसर पर तुलसीपीठाधीश्वर, पद्मविभूषण जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी का दिव्य सान्निध्य प्राप्त हुआ, जिन्हें विश्वविद्यालय ने मानद डी.लिट. उपाधि से सम्मानित किया। समारोह में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने वर्चुअल रूप से मार्गदर्शन प्रदान किया। मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल, कैबिनेट मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, सागर सांसद डॉ. लता वानखेड़े, विधायक वीरेंद्र सिंह लोधी, और कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति, शिक्षक, और छात्र उपस्थित रहे।
जगद्गुरु रामभद्राचार्य का सान्निध्य और मानद उपाधि
समारोह की गरिमा को बढ़ाते हुए जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य, जो रामानंद संप्रदाय के चार जगद्गुरुओं में से एक हैं, ने अपनी उपस्थिति और प्रेरक वाणी से सभी को मंत्रमुग्ध किया। विश्वविद्यालय ने उनके शिक्षा, साहित्य, और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान को मान्यता देते हुए उन्हें मानद डी.लिट. उपाधि से सम्मानित किया। स्वामी रामभद्राचार्य, जो चित्रकूट में जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय के संस्थापक और आजीवन कुलाधिपति हैं, ने अपने संबोधन में कर्तव्यनिष्ठा को सबसे बड़ा धर्म बताते हुए सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था पर तीखे कटाक्ष किए। उन्होंने छात्रों को अनुशासन, समर्पण, और नैतिकता के साथ अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ने की प्रेरणा दी।

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957 विद्यार्थियों को उपाधि और स्वर्ण पदक
दीक्षांत समारोह में 957 विद्यार्थियों को स्नातक, स्नातकोत्तर, और शोध स्तर की उपाधियाँ प्रदान की गईं। कई मेधावी छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। समारोह में बुंदेली वेशभूषा में उपाधि प्राप्त करते हुए विद्यार्थियों का उत्साह और जोश देखते ही बनता था। सागर सांसद डॉ. लता वानखेड़े ने विद्यार्थियों की सफलता पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा, “छात्रों का जोश और उनकी उपलब्धियाँ सागर की शैक्षिक विरासत को और मजबूत करती हैं।” उन्होंने सभी उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का वर्चुअल मार्गदर्शन
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने वर्चुअल रूप से अपने संबोधन में विद्यार्थियों को राष्ट्र निर्माण में योगदान देने और नवाचार के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक विरासत की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान शिक्षा और सामाजिक विकास का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। गडकरी ने विशेष रूप से बुंदेलखंड क्षेत्र के विकास में विश्वविद्यालय की भूमिका पर जोर दिया और छात्रों को आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।
उपमुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्री की उपस्थिति
मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने अपने संबोधन में विश्वविद्यालय के संस्थापक डॉ. हरिसिंह गौर के शिक्षा के प्रति समर्पण को याद किया। उन्होंने कहा, “डॉ. गौर ने अपनी जीवन भर की कमाई इस विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए दान कर दी, जो आज भी लाखों युवाओं को प्रेरित करता है।” कैबिनेट मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने भी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह विश्वविद्यालय न केवल सागर, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश का गौरव है।

विश्वविद्यालय की कुलपति और आयोजन
कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता ने समारोह की अध्यक्षता की और विश्वविद्यालय की प्रगति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह दीक्षांत समारोह न केवल विद्यार्थियों की उपलब्धियों का उत्सव है, बल्कि विश्वविद्यालय की शैक्षिक उत्कृष्टता और सामाजिक प्रतिबद्धता का भी प्रतीक है। उन्होंने जगद्गुरु रामभद्राचार्य के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनकी उपस्थिति ने इस समारोह को ऐतिहासिक बना दिया।
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उपस्थित गणमान्य व्यक्ति और सामुदायिक प्रभाव
कार्यक्रम में विधायक वीरेंद्र सिंह लोधी, अन्य जनप्रतिनिधि, शिक्षकगण, और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। समारोह में बुंदेली संस्कृति की झलक देखने को मिली, जिसमें विद्यार्थियों ने पारंपरिक वेशभूषा में उपाधियाँ प्राप्त कीं। यह आयोजन न केवल शैक्षिक उपलब्धियों का उत्सव था, बल्कि सागर की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को भी प्रदर्शित करता था।
विश्वविद्यालय का ऐतिहासिक महत्व
डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय, जिसकी स्थापना 1946 में डॉ. हरिसिंह गौर ने अपनी जीवन भर की कमाई से की थी, मध्य प्रदेश का सबसे पुराना और प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय है। यह संस्थान शिक्षा, अनुसंधान, और सामाजिक विकास के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका के लिए जाना जाता है। इस दीक्षांत समारोह ने विश्वविद्यालय की गौरवशाली परंपरा को और मजबूत किया।
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33वां दीक्षांत समारोह सागर के शैक्षिक और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बना। जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य का सान्निध्य, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का मार्गदर्शन, और मध्य प्रदेश सरकार के प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया। सभी उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दी गईं, और यह समारोह सागर की शैक्षिक विरासत और सामाजिक एकता को रेखांकित करने में सफल रहा।

