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ग्रहण क्या होता है और यह कितने प्रकार का होता है? 2025 में ग्रहण कब लगेगा और भारत पर इसका असर होगा या नहीं? ग्रहण के दौरान क्या सावधानियां बरते?

ग्रहण क्या होता है?

ग्रहण एक खगोलीय घटना है जो तब होती है जब कोई खगोलीय पिंड (जैसे चंद्रमा या पृथ्वी) किसी अन्य पिंड की रोशनी को अवरुद्ध कर देता है। यह मुख्य रूप से सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी की स्थिति के संरेखण के कारण होता है। ग्रहण दो मुख्य प्रकार के होते हैं: सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण।

ग्रहण के प्रकार

  1. सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse):
    • यह तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है, जिससे सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक पहुंचने में बाधा उत्पन्न होती है।
    • इसके तीन उप-प्रकार हैं:
      • पूर्ण सूर्य ग्रहण: चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक लेता है।
      • आंशिक सूर्य ग्रहण: चंद्रमा सूर्य के केवल एक हिस्से को ढकता है।
      • वलयाकार सूर्य ग्रहण: चंद्रमा सूर्य के केंद्र को ढकता है, लेकिन किनारों पर एक चमकदार वलय (रिंग) दिखाई देती है।
  2. चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse):
    • यह तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, जिससे पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है।
    • इसके तीन उप-प्रकार हैं:
      • पूर्ण चंद्र ग्रहण: चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की छाया में आ जाता है।
      • आंशिक चंद्र ग्रहण: चंद्रमा का केवल एक हिस्सा छाया में आता है।
      • उपच्छाया चंद्र ग्रहण: चंद्रमा पृथ्वी की हल्की छाया (उपच्छाया) से गुजरता है, जिससे यह धुंधला दिखता है।

2025 में ग्रहण कब लगेगा और भारत पर असर

साल 2025 में कुल चार ग्रहण होंगे—दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण। इनका विवरण और भारत पर प्रभाव निम्नलिखित है:

  1. 14 मार्च 2025 – पूर्ण चंद्र ग्रहण:
    • समय: सुबह 9:27 बजे से दोपहर 12:28 बजे तक (भारतीय समयानुसार)।
    • दृश्यता: यह भारत में दिखाई नहीं देगा, क्योंकि यह दिन के समय होगा। यह अमेरिका, पश्चिमी यूरोप, और अटलांटिक क्षेत्र में दिखेगा।
    • भारत पर असर: चूंकि यह भारत में दिखाई नहीं देगा, इसका सूतक काल (धार्मिक रूप से अशुभ समय) मान्य नहीं होगा और कोई खास प्रभाव नहीं पड़ेगा।
  2. 29 मार्च 2025 – आंशिक सूर्य ग्रहण:
    • समय: दोपहर 2:20 बजे से शाम 6:13 बजे तक (भारतीय समयानुसार)।
    • दृश्यता: यह उत्तरी अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका, और उत्तरी एशिया में दिखेगा, लेकिन भारत में नहीं।
    • भारत पर असर: भारत में न दिखने के कारण सूतक काल लागू नहीं होगा और रोजमर्रा के कार्यों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
  3. 7-8 सितंबर 2025 – पूर्ण चंद्र ग्रहण:
    • समय: रात 9:57 बजे से 1:26 बजे तक (भारतीय समयानुसार)।
    • दृश्यता: यह भारत में दिखाई देगा, साथ ही एशिया, ऑस्ट्रेलिया, और हिंद महासागर क्षेत्र में भी।
    • भारत पर असर: चूंकि यह भारत में दिखेगा, इसका सूतक काल मान्य होगा (आमतौर पर ग्रहण से 9 घंटे पहले शुरू)। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान कुछ सावधानियां बरतनी होंगी।
  4. 21-22 सितंबर 2025 – आंशिक सूर्य ग्रहण:
    • समय: रात 10:59 बजे से तड़के 3:23 बजे तक (भारतीय समयानुसार)।
    • दृश्यता: यह न्यूजीलैंड, अंटार्कटिका, और प्रशांत महासागर क्षेत्र में दिखेगा, लेकिन भारत में नहीं।
    • भारत पर असर: भारत में न दिखने से सूतक काल लागू नहीं होगा और कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

ग्रहण के दौरान सावधानियां

इसे भी पढ़ें: उनसे पूछो मंदिर क्या है ?

हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के दौरान कुछ सावधानियां बरतने की सलाह दी जाती है, खासकर जब ग्रहण भारत में दिखाई दे (जैसे 7-8 सितंबर 2025 का चंद्र ग्रहण)। ये सावधानियां निम्नलिखित हैं:

  • भोजन से परहेज: ग्रहण से पहले और उसके दौरान भोजन न करें। पहले से बने भोजन में तुलसी के पत्ते डालें।
  • पूजा-पाठ न करें: मंदिरों के कपाट बंद रहते हैं, और घर में भी मूर्तियों को स्पर्श न करें।
  • स्नान: ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करें और घर में गंगाजल का छिड़काव करें।
  • मंत्र जाप: ग्रहण के दौरान मंत्रों का जाप (जैसे “ॐ नमः शिवाय” या सूर्य/चंद्र मंत्र) करने से नकारात्मक प्रभाव कम हो सकता है।
  • गर्भवती महिलाएं: बाहर न निकलें, नुकीली चीजों का उपयोग न करें, और ग्रहण को न देखें, क्योंकि मान्यता है कि इससे शिशु पर असर पड़ सकता है।
  • सूर्य ग्रहण के लिए खास: सूर्य को नग्न आंखों से न देखें; विशेष चश्मे का उपयोग करें।

नोट

  • वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ग्रहण एक सामान्य खगोलीय घटना है और इसका स्वास्थ्य या पर्यावरण पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ता, सिवाय सूर्य ग्रहण को बिना सुरक्षा के देखने से आंखों को नुकसान के।
  • धार्मिक प्रभाव और सावधानियां सांस्कृतिक मान्यताओं पर आधारित हैं और व्यक्तिगत आस्था पर निर्भर करती हैं।

इसलिए, 2025 में भारत में केवल 7-8 सितंबर का चंद्र ग्रहण ही दिखेगा और उसी के लिए सावधानियां जरूरी होंगी। बाकी ग्रहणों का भारत पर कोई प्रत्यक्ष असर नहीं होगा।

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News Desk

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