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टीकमगढ़ में स्वामी विवेकानंद जयंती एवं राष्ट्रीय युवा दिवस पर भव्य सामूहिक सूर्य नमस्कार कार्यक्रम

अतुल्य भारत चेतना (सुरेश कुमार चौधरी)

टीकमगढ़: स्वामी विवेकानंद जी की जन्म जयंती और राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर जिला स्तरीय सामूहिक सूर्य नमस्कार कार्यक्रम का आयोजन नजरबाग मैदान में बड़े उत्साह के साथ संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में केन्द्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने शिरकत की। डॉ. वीरेंद्र कुमार टीकमगढ़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद भी हैं और इस आयोजन से युवाओं में स्वास्थ्य, अनुशासन एवं स्वामी विवेकानंद के आदर्शों के प्रति नई ऊर्जा का संचार हुआ।

कार्यक्रम में हजारों की संख्या में छात्र-छात्राएं, शिक्षक, युवा, स्थानीय नागरिक तथा विभिन्न जनप्रतिनिधियों ने एक साथ सूर्य नमस्कार किया। सूर्य नमस्कार के माध्यम से शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक एकाग्रता और आध्यात्मिक जागृति पर बल दिया गया, जो स्वामी विवेकानंद के युवा शक्ति एवं राष्ट्र निर्माण के संदेश से पूरी तरह जुड़ा हुआ है।

इस अवसर पर विशेष रूप से उपस्थित प्रमुख अतिथिगणों में शामिल थे:

  • श्रीमती सरोज राजपूत
  • श्री विवेक चतुर्वेदी
  • सांसद प्रतिनिधि श्री अनुराग वर्मा
  • पूर्व विधायक टीकमगढ़ श्री के.के. श्रीवास्तव
  • श्री अभय यादव
  • अन्य जनप्रतिनिधिगण

प्रशासनिक अधिकारियों में जिला कलेक्टर श्री विवेक श्रोत्रिय, जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री नवीत कुमार धुर्वे, अपर कलेक्टर श्री शिवप्रसाद मंडराह सहित अन्य संबंधित अधिकारीगण मौजूद रहे। विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और स्थानीय जनों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।

कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को स्वामी विवेकानंद के जीवन दर्शन—’उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए’—से प्रेरित करना था। सामूहिक सूर्य नमस्कार न केवल शारीरिक व्यायाम का माध्यम बना, बल्कि युवा पीढ़ी में एकता, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति की भावना को भी मजबूत किया।

डॉ. वीरेंद्र कुमार ने अपने मुख्य अतिथि संबोधन में स्वामी विवेकानंद के योगदान को याद करते हुए कहा कि युवा शक्ति ही राष्ट्र की असली ताकत है। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि स्वास्थ्य, शिक्षा और संस्कारों के माध्यम से देश निर्माण में योगदान दें।

यह कार्यक्रम टीकमगढ़ जिले में युवा दिवस मनाने की परंपरा को और मजबूत करने वाला साबित हुआ, जहां स्वास्थ्य जागरूकता के साथ आध्यात्मिकता का सुंदर संगम देखने को मिला। स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सहयोग से आयोजित इस भव्य कार्यक्रम ने पूरे क्षेत्र में सकारात्मक संदेश फैलाया।

स्वामी विवेकानंद के योगदान

स्वामी विवेकानंद (1863-1902), जिनका मूल नाम नरेंद्रनाथ दत्त था, एक महान भारतीय संत, दार्शनिक, लेखक और रामकृष्ण परमहंस के प्रमुख शिष्य थे। उन्होंने अपने छोटे से जीवनकाल में ही भारत और विश्व को आध्यात्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक तथा राष्ट्रीय स्तर पर गहन योगदान दिया। उनके विचार आज भी युवाओं, राष्ट्रवादियों और आध्यात्मिक साधकों के लिए प्रेरणा स्रोत बने हुए हैं।

1. विश्व पटल पर भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म का प्रतिनिधित्व

1893 में शिकागो (अमेरिका) में आयोजित विश्व धर्म संसद (World’s Parliament of Religions) में उनके ऐतिहासिक भाषण ने विश्व का ध्यान आकर्षित किया। “बहनों और भाइयों” से शुरू होने वाले इस भाषण ने सहिष्णुता, सभी धर्मों की एकता और हिंदू धर्म की सार्वभौमिकता का संदेश दिया। इससे हिंदू धर्म को विश्व स्तर पर एक प्रमुख धर्म के रूप में स्थापित किया और भारत की छवि को नकारात्मक से सकारात्मक बनाया।

2. वेदांत और योग का पश्चिमी दुनिया में प्रचार

स्वामी विवेकानंद ने वेदांत दर्शन और योग को पश्चिमी जगत में पहली बार व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत किया। उन्होंने राजयोग, कर्मयोग, भक्तियोग और ज्ञानयोग पर आधारित पुस्तकें लिखीं, जो आज भी विश्व प्रसिद्ध हैं। उनके प्रयासों से योग और ध्यान पश्चिम में लोकप्रिय हुए, जो आज वैश्विक स्तर पर फैला हुआ है।

3. रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन की स्थापना

1897 में उन्होंने रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन की स्थापना की, जो आज भी शिक्षा, स्वास्थ्य, आपदा राहत और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में सक्रिय है। मिशन का मूल मंत्र “आत्मनो मोक्षार्थं जगद् हिताय च” (अपने मोक्ष के लिए और जगत के हित के लिए) है, जो सेवा को आध्यात्मिक साधना का हिस्सा बनाता है।

4. युवा शक्ति का जागरण और राष्ट्रीय चेतना

स्वामी विवेकानंद ने युवाओं को राष्ट्र निर्माण का आधार माना। उनका प्रसिद्ध संदेश—”उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए”—भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और आधुनिक युवा आंदोलनों की प्रेरणा बना। उन्होंने भारत में व्याप्त गरीबी, अंधविश्वास और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता फैलाई तथा युवाओं में आत्मविश्वास और राष्ट्रभक्ति जगाई। भारत सरकार द्वारा उनकी जन्म जयंती (12 जनवरी) को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है।

5. शिक्षा सुधार और मानव निर्माण का दर्शन

उन्होंने शिक्षा को मात्र किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि मनुष्य निर्माण का माध्यम माना। शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो चरित्र निर्माण करे, शारीरिक-मानसिक शक्ति दे और आत्मविश्वास जगाए। उन्होंने महिलाओं की शिक्षा और समाज के पिछड़े वर्गों के उत्थान पर भी जोर दिया।

6. धार्मिक सहिष्णुता और सार्वभौमिक धर्म की स्थापना

स्वामी विवेकानंद ने सभी धर्मों को एक ही सत्य की विभिन्न अभिव्यक्तियां माना। उन्होंने कहा कि “सभी धर्म एक ही लक्ष्य की ओर ले जाते हैं”। उनके विचारों ने भारतीय धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक सद्भाव की नींव मजबूत की, जो आज भी प्रासंगिक है।

7. भारतीय पुनर्जागरण में प्रमुख भूमिका

19वीं शताब्दी के भारतीय पुनर्जागरण (Indian Renaissance) में उनका योगदान अतुलनीय है। उन्होंने भारतीय संस्कृति के गौरव को पुनः स्थापित किया, पश्चिमी प्रभाव से मुक्ति दिलाई और स्वदेशी चेतना जगाई। रवींद्रनाथ टैगोर ने कहा था—”यदि आप भारत को जानना चाहते हैं, तो विवेकानंद को पढ़ें।”

स्वामी विवेकानंद का जीवन और योगदान आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने दिखाया कि आध्यात्मिकता और सेवा, राष्ट्रभक्ति और मानवता एक साथ चल सकती हैं। उनके विचार न केवल भारत बल्कि पूरी मानवता के लिए मार्गदर्शक बने रहेंगे।

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News Desk

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