अतुल्य भारत चेतना (संवाददाता: रमाकांत यादव)
लखीमपुर खीरी: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के निघासन ब्लॉक अंतर्गत मांझा पंचायत में आवंटित खनन पट्टे को लेकर क्षेत्र के किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है। किसानों की शिकायत पर जिला अधिकारी के निर्देश पर गठित प्रशासनिक टीम ने ठेकेदार द्वारा बनाए गए पुल की जांच की, लेकिन मौके पर पहुंचते ही किसानों और सिख संगठनों ने खनन कार्य की कड़ी विरोध किया। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि जबरन खनन कराया गया तो बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।
जांच के दौरान मौके पर हल्की नोकझोक की स्थिति भी उत्पन्न हुई। आक्रोशित किसानों ने मुर्दाबाद के नारे लगाए और किसी भी हालत में खनन कार्य नहीं होने देने की दृढ़ता व्यक्त की। किसानों का कहना है कि खनन कार्य से उनकी कृषि भूमि, जल स्रोत और पर्यावरण को गंभीर क्षति पहुंचेगी, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित होगी। उन्होंने अधिकारियों से खनन कार्य पूरी तरह रोकने की मांग की।
जिला अधिकारी के निर्देश पर गठित जांच टीम में उप जिलाधिकारी निघासन राजीव निगम, खनन इंस्पेक्टर आशीष सिंह, लोक निर्माण विभाग के जूनियर इंजीनियर पी.के. सरोज तथा सिंगाही थाना प्रभारी मनीष कुमार सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर उपस्थित रहे। अधिकारियों ने ग्रामीणों की समस्याओं को ध्यान से सुना और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। टीम ने ठेकेदार द्वारा निर्मित पुल का निरीक्षण किया और ग्रामीणों के निवेदन पर खनन कार्य न कराने की मांग को दर्ज किया।
यह मामला क्षेत्र में खनन पट्टों को लेकर बढ़ते विवादों का हिस्सा प्रतीत होता है। स्थानीय लोग लंबे समय से खनन गतिविधियों के पर्यावरणीय और कृषि संबंधी दुष्प्रभावों का विरोध कर रहे हैं। प्रशासन ने मामले की गहन जांच का भरोसा दिलाया है, लेकिन किसानों का कहना है कि जब तक खनन पट्टा रद्द नहीं किया जाता, उनका विरोध जारी रहेगा।
यह घटना जिले में खनन संबंधी शिकायतों और विरोध प्रदर्शनों की श्रृंखला में एक नया अध्याय जोड़ती है, जहां किसान अपनी भूमि और जल संसाधनों की रक्षा के लिए एकजुट हो रहे हैं।

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