50 दिनों में बस्तर रेंज में 512 से अधिक माओवादी मुख्यधारा में लौटे, शांति प्रक्रिया ने पकड़ी रफ्तार
अतुल्य भारत चेतना
खुमेश यादव
छत्तीसगढ़। नारायणपुर, जिले में “पूना मारगेम : पुनर्वास से पुनर्जीवन” पहल के तहत आज एक महत्वपूर्ण सफलता दर्ज हुई। कुल 28 माओवादी कैडरों ने हिंसा छोड़कर सामाजिक मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। इनमें उन्नीस महिला माओवादी भी शामिल हैं, जिन पर कुल 89 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
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यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ शासन, भारत सरकार, बस्तर पुलिस, स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। पहल का उद्देश्य बस्तर में शांति स्थापित करना,
पुनर्वास करने वालों में माड़ डिवीजन के डीवीसीएम सदस्य, पीएलजीए की कंपनी नंबर छह के मिलिट्री सदस्य, एरिया कमेटी और टेक्निकल टीम के सदस्य, मिलिट्री प्लाटून के पीपीसीएम और सदस्य, एसजेडसीएम भास्कर की गार्ड टीम, सप्लाई टीम, एलओएस सदस्य तथा जनताना सरकार के प्रतिनिधि शामिल हैं। सभी ने मुख्यधारा में जुड़कर शांति और विकास का मार्ग अपनाने की इच्छा व्यक्त की। कार्यक्रम के दौरान तीन माओवादी कैडरों ने अपने पास मौजूद तीन हथियार — एसएलआर, इंसास और थ्री नॉट थ्री राइफल — सुरक्षा बलों को विधिवत रूप से सौंपे। यह कदम कानून व्यवस्था पर विश्वास और हिंसा से दूरी का स्पष्ट संकेत माना गया।

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पुलिस अधीक्षक नारायणपुर श्री रॉबिन्सन गुड़िया ने बताया कि आज की कार्रवाई के बाद वर्ष 2025 में जिले में कुल 287 माओवादी कैडर आत्मसमर्पण कर चुके हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि क्षेत्र में विश्वास और शांति की प्रक्रिया लगातार गति प्राप्त कर रही है।
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बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक श्री सुन्दरराज पत्तिलिंगम ने कहा कि नारायणपुर में अट्ठाईस माओवादी कैडरों का आत्मसमर्पण यह दर्शाता है कि हिंसा और जनविरोधी विचारधारा की समाप्ति अब निकट है। उन्होंने बताया कि पिछले पचास दिनों में बस्तर रेंज में पांच सौ बारह से अधिक माओवादी कैडर सामाजिक मुख्यधारा से जुड़े हैं।

