वाराणसी लाठीचार्ज के खिलाफ मोदी-योगी का पुतला दहन, कांग्रेस का “मनरेगा बचाओ संग्राम” अभियान शुरू
अतुल्य भारत चेतना (वीरेंद्र यादव)
बिलासपुर। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) ने मनरेगा योजना का नाम बदलने के केंद्र सरकार के कदम के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराया। लाठीचार्ज के खिलाफ आज महामाया चौक पर NSUI की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का पुतला दहन किया गया। प्रदर्शन का नेतृत्व बेलतरा विधानसभा अध्यक्ष विक्की यादव, प्रदेश महासचिव विकास ठाकुर एवं प्रदेश सचिव लोकेश नायक ने किया। NSUI ने इस प्रदर्शन को “मनरेगा बचाओ संग्राम” अभियान का हिस्सा बताते हुए कहा कि यह योजना गरीब, दलित, आदिवासी एवं बहुजन समाज की रोजी-रोटी का आधार है, जिसे कमजोर करने की साजिश हो रही है।

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NSUI की ओर से आयोजित इस प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं ने जोरदार नारेबाजी की और मनरेगा के नाम परिवर्तन का फैसला तत्काल वापस लेने की मांग की। प्रदर्शनकारी युवाओं ने वाराणसी में NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी के नेतृत्व में शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर हुए लाठीचार्ज की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार द्वारा गरीबों के हित में बनाई गई योजना को भाजपा सरकार समाप्त करने की कोशिश कर रही है।
NSUI नेताओं के बयान
बेलतरा विधानसभा अध्यक्ष विक्की यादव ने कहा: “मनरेगा कांग्रेस सरकार द्वारा गरीबों और मजदूरों के लिए बनाया गया जनकल्याणकारी कानून है। भाजपा सरकार इसका नाम बदलकर गरीबों के अधिकारों को कमजोर करना चाहती है। वाराणसी में छात्रों पर किया गया लाठीचार्ज तानाशाही मानसिकता का प्रमाण है, जिसका NSUI सड़कों पर उतरकर जवाब देगी।”
प्रदेश महासचिव विकास ठाकुर ने कहा: “प्रधानमंत्री के लोकसभा क्षेत्र में शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन पर लाठीचार्ज यह दर्शाता है कि भाजपा सरकार छात्रों और गरीबों की आवाज़ से डरती है। मनरेगा के नाम से छेड़छाड़ और दमन की राजनीति NSUI कभी स्वीकार नहीं करेगी।”
प्रदेश सचिव लोकेश नायक ने कहा: “NSUI मनरेगा के नाम परिवर्तन के किसी भी प्रयास का पुरजोर विरोध करती है। छात्रों पर लाठीचार्ज कर सरकार अपनी नाकामियों को छिपाना चाहती है, लेकिन NSUI का हर कार्यकर्ता गरीबों, मजदूरों और छात्रों की आवाज़ बनकर संघर्ष करता रहेगा।”
प्रमुख मांगें
प्रदर्शन के दौरान NSUI ने निम्नलिखित मांगें रखीं:
- मनरेगा नाम परिवर्तन का फैसला तत्काल वापस लिया जाए।
- वाराणसी लाठीचार्ज की न्यायिक जांच कराई जाए।
- दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
- योजना में गरीबों के लिए 100 दिनों का गारंटीड रोजगार एवं समय पर मजदूरी सुनिश्चित की जाए।
NSUI ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जनविरोधी फैसले और छात्र दमन की नीति नहीं बदली, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी केंद्र एवं राज्य सरकार की होगी। यह प्रदर्शन कांग्रेस की ओर से मनरेगा को बचाने और गरीबों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में युवा कार्यकर्ता शामिल हुए, जिन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना की।

