अतुल्य भारत चेतना
प्रमोद कश्यप
रतनपुर/बिलासपुर। नवरात्रि के पावन अवसर पर विश्व के 51 सिद्ध शक्तिपीठों में शामिल चतुर्युगी ऐतिहासिक नगरी रतनपुर के सिद्ध शक्तिपीठ महामाया मंदिर में भक्ति और आस्था का अनुपम संगम देखने को मिला। इस वर्ष नवरात्रि में 31,000 ज्योति कलश प्रज्वलित किए गए, जो मंदिर परिसर को दिव्य प्रकाश से आलोकित कर रहे हैं। सप्तमी तिथि पर देवी के कालरात्रि स्वरूप के दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ सुबह से शुरू होकर पूरी रात्रि तक लगी रही। मां महामाया के जयकारों से पूरा रतनपुर नगर गुंजायमान हो उठा, और बिलासपुर से रतनपुर के बीच की 25 किलोमीटर की दूरी मानो सिमटकर एक जगह रह गई।

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भक्तों की अपार भीड़ और दिव्य दर्शन
नवरात्रि के सप्तमी दिवस पर मां कालरात्रि के स्वरूप में देवी के दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। सुबह से ही मंदिर के द्वार पर लंबी कतारें देखी गईं, जो रात्रि भर जारी रहीं। भक्तों ने मां महामाया की आरती में भाग लिया और जयकारे लगाते हुए अपनी श्रद्धा व्यक्त की। मंदिर समिति के अनुसार, इस वर्ष ज्योति कलशों की संख्या 31,000 तक पहुंची, जो भक्तों की बढ़ती आस्था का प्रतीक है। एक स्थानीय भक्त ने बताया, “मां कालरात्रि का दर्शन हमें शक्ति और साहस प्रदान करता है। हर साल यहां आकर मन को शांति मिलती है।”

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बिलासपुर से रतनपुर तक का मार्ग श्रद्धालुओं से भरा रहा। कई जगहों पर ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी, लेकिन भक्ति के उत्साह ने किसी को थकने नहीं दिया। प्रशासन की ओर से यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे, जिसमें पुलिस बल की तैनाती और वैकल्पिक मार्गों का उपयोग शामिल था।
श्रद्धालुओं की सेवा में लगे स्टॉल और अन्य मंदिरों में उमड़ी भीड़
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मार्ग में जगह-जगह स्टॉल लगाए गए थे। इन स्टॉलों में विभिन्न प्रकार के प्रसाद, फल, जलपान और पेयजल की निःशुल्क व्यवस्था की गई थी। सामाजिक संगठनों और स्थानीय निवासियों द्वारा संचालित इन स्टॉलों ने भक्तों की थकान दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एक स्वयंसेवी ने कहा, “यह सेवा मां महामाया की कृपा प्राप्त करने का माध्यम है। हम हर साल यहां आकर भक्तों की मदद करते हैं।”

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महामाया मंदिर के अलावा रतनपुर के अन्य प्रमुख मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की भीड़ पूरी रात दिखाई दी। भैरव बाबा मंदिर, लखनी देवी मंदिर, तुलजा भवानी मंदिर और सिद्धिविनायक मंदिर जैसे स्थलों पर भक्तों ने पूजा-अर्चना की। इन मंदिरों में विशेष आरती और भजन-कीर्तन के कार्यक्रम आयोजित किए गए, जो रात्रि भर चले। रतनपुर की यह ऐतिहासिक नगरी नवरात्रि के दौरान एक जीवंत तीर्थस्थल में परिवर्तित हो जाती है, जहां देश-विदेश से भक्त आते हैं।
अष्टमी पर हवन कार्यक्रम और आगामी आयोजन
आज अष्टमी तिथि पर महामाया मंदिर में हवन का कार्यक्रम शाम 4:00 बजे से शुरू हुआ। यह हवन देवी की कृपा प्राप्त करने और नवरात्रि के अनुष्ठानों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मंदिर समिति के पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन संपन्न किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों ने भाग लिया। शेष मंदिरों और दुर्गा पंडालों में आज रात्रि में तथा कल नवमी तिथि पर हवन के कार्यक्रम आयोजित होंगे। इन आयोजनों में कन्या पूजन, कुमारी भोज और अन्य धार्मिक क्रियाएं भी शामिल हैं। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे हवन में भाग लेकर मां की कृपा प्राप्त करें। साथ ही, सुरक्षा और व्यवस्था को बनाए रखने के लिए मास्क पहनने और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की सलाह दी गई है।

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घटना: चाकूबाजी की घटना में एक घायल
इस उत्सव के बीच एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना भी घटी। महामाया मंदिर परिसर के ज्योति कलश भवन के ऊपर चाकूबाजी की घटना हुई, जिसमें एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घायल को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और संदिग्धों की तलाश कर रही है। मंदिर समिति ने इस घटना पर खेद व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं उत्सव की पवित्रता को प्रभावित करती हैं, और वे सुरक्षा बढ़ाने के लिए प्रशासन से सहयोग मांग रहे हैं।

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यह नवरात्रि उत्सव रतनपुर की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को जीवंत रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। लाखों भक्तों की उपस्थिति से सिद्ध होता है कि मां महामाया की कृपा यहां के निवासियों और श्रद्धालुओं पर हमेशा बनी रहती है। आने वाले दिनों में नवमी और दशमी के आयोजन और अधिक भव्य होंगे, जो विजय दशमी पर रावण दहन के साथ समाप्त होंगे।

