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राष्ट्र निर्माण के लिए चरित्र निर्माण जरूरी- ब्रह्माकुमारी रेखा दीदी

खुशी के लिए नहीं बल्कि खुश रहकर कार्य करने में सफलता है

अतुल्य भारत चेतना
हाकम सिंह रघुवंशी

गंजबासौदा। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय मनसा पूर्ण हनुमान मंदिर के पास स्थित सेवाकेंद्र द्वारा”राष्ट्र निर्माण के लिए आध्यात्मिक ज्ञान” विषय पर कार्यक्रम का आयोजन हुआ।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सेवाकेंद्र निदेशिका ब्रह्माकुमारी रेखा दीदी ने कहा की राष्ट्र का असली निर्माण चरित्र से होता है। हमारी संस्कृति सिखाती है कि सबसे बड़ा धन ज्ञान है।

एक ज्ञानी और चरित्रवान व्यक्ति के पीछे स्थूल धन स्वतः ही आता हैव्यक्ति केवल शिक्षा से ही नहीं बल्कि अपने कर्म से भी सिखाता है। क्योंकि व्यक्ति का आचरण लोगों को प्रेरित करता है।उन्होंने कहा कि हमारा मूल स्वरूप शांत है।

झुकना कोई कमजोरी नहीं है।झुकने से व्यक्ति की महानता और बढ़ जाती है।आज मन की शक्ति बहुत तेजी से कम हो रही है। जिस कारण समय की कमी महसूस होती है। एक कमजोर मन ही गुलामी का अनुभव करता है।

मानसिक दबाव को कम करने के लिए आंतरिक शक्ति बढ़ाने की जरूरत है। इसमें हम सभी की बहुत बड़ी जिम्मेवारी है। शिक्षा के साथ-साथ आध्यात्मिक ज्ञान जरूरी है। इसलिए प्राचीन भारतीय संस्कृति में बच्चों को गुरुकुल में शिक्षा दी जाती थी। उन्होंने कहा कि जीवन में खुशी के लिए नहीं बल्कि खुश रहकर कार्य करने में सफलता है। क्योंकि खुशी हमारी खुद की चॉइस है। खुशी के लिए दूसरों पर निर्भर न रहें। सफलता का वास्तविक अर्थ दूसरों को देने में है। ब्रह्माकुमारी रुक्मणी दीदी ने कहा कि आज भावनात्मक रूप से मजबूत होने की जरूरत है। जितना भावनात्मक रूप से शक्तिशाली होंगे, उतना ही आध्यात्मिक चेतना विकसित होगी। रोज अपने लिए एक घंटा दें। अपने आपसे बातें करें। अपनी भावनाओं को कंट्रोल करना सीखें। भावनात्मक रूप से निर्भर होना ही सबसे बड़ी कमजोरी है।

हमें अपने आसपास एक ऐसी संस्कृति बनाने की आवश्यकता है। जिसमें आध्यात्मिक और नैतिक मूल्यों की जागृति हो। क्योंकि भारतीय संस्कृति का मूल आध्यात्मिकता है। साथ ही ब्रह्माकुमारी नंदिनी दीदी ने राजयोग के अभ्यास से उनके जीवन में आए सकारात्मक परिवर्तन के विषय में बताया की मूल्यनिष्ठ वह हैं जिसके सभी सम्बन्ध-सम्पर्क वाले व्यक्तियों से मधुर सम्बन्ध हो एवं मूल्यनिष्ठ व्यक्ति सभी का सहयोग करता है एवं सभी का सहयोग भी प्राप्त करता है। उन्होंने यह भी बताया की मूल्यवान वास्तव में आत्मा बनती है शरीर का मूल्य तभी है जब उसमें रहने वाली आत्मा’ मूल्यवान बने। मनुष्य को मूल्यवान बनाने वाला हमारा परमपिता परमात्मा शिवबाबा एक ही है।

शिवबाबा द्वारा दिए गये आध्यात्मिक ज्ञान ( ज्ञान मुरली) को पढ़कर हम अपने संस्कारों को श्रेष्ठ बना सकते है। बीके अनु दीदी ने ब्रह्माकुमारीज संस्था का परिचय देने के साथ-साथ मंच संचालन भी किया। अधिक संख्या में लोगों ने कार्यक्रम का लाभ लिया।

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News Desk

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