रुद्रपुर – अब रुद्रपुर के एएन झा इंटर कॉलेज परिसर में आम, लीची और अमरूद जैसे फलदार पेड़ लहलहाते नजर आएंगे। विद्यालय परिसर में बीते दिनों करीब दो एकड़ क्षेत्रफल में लगभग 300 फलदार पौधे रोपे गए हैं। इस पहल से आने वाले समय में विद्यार्थियों को बिना रसायन वाले पौष्टिक फल मिलेंगे, साथ ही वे फल उत्पादन और बागवानी से जुड़ा व्यावहारिक ज्ञान भी प्राप्त कर सकेंगे।
आमतौर पर सरकारी स्कूलों का नाम आते ही अव्यवस्थाओं और दुर्दशा की तस्वीर सामने आ जाती है, लेकिन एएन झा इंटर कॉलेज ने इस सोच को बदलने का कार्य किया है। पिछले ढाई वर्षों में प्रधानाचार्य दयाशंकर शर्मा ने अपनी शिक्षकों की टीम के साथ मिलकर विद्यालय में कई सकारात्मक बदलाव किए हैं। उन्होंने न केवल शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाया, बल्कि विद्यार्थियों को जीवन की चुनौतियों से जूझने का आत्मविश्वास और संस्कार भी सिखाए हैं।
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प्रधानाचार्य ने अपने वेतन से रामायण की चौपाइयों और प्रेरक संदेशों वाली फ्लेक्सियां लगवाने, छात्र-छात्राओं के लिए “स्टूडेंट टाइम टेबल एट होम” जैसी पहल करने के साथ-साथ विद्यालय में पर्यावरण संरक्षण और भौतिक संसाधनों के विकास की एक अनूठी मिसाल पेश की है।
इन दिनों स्कूलों में शीतावकाश चल रहा है। इस खाली समय का सदुपयोग करते हुए प्रधानाचार्य दयाशंकर शर्मा ने ग्रीनरी फाउंडेशन के सहयोग से विद्यालय परिसर में आम, अमरूद और लीची के 300 पौधे रोपित कराए। उन्होंने इन पौधों की नियमित देखरेख की जिम्मेदारी भी स्वयं ली है। इससे पहले छह माह पूर्व भी विद्यालय भवन के पीछे खाली पड़ी भूमि पर 1400 पौधे लगाए गए थे, जिनमें 800 आम, 250 आंवला और 250 अमरूद के पौधे शामिल थे। पौधों की संख्या बढ़ने से अब पूरा विद्यालय परिसर एक बगीचे का आभास देने लगा है।
तीन कतार में विकसित किया गया उद्यान
प्रधानाचार्य दयाशंकर शर्मा और शिक्षकों की मेहनत से विद्यालय में फलदार उद्यान को तीन कतारों में विकसित किया गया है। इसमें 200 आम, 50 अमरूद और 50 लीची के पौधे लगाए गए हैं। प्रधानाचार्य ने बताया कि इसके लिए उन्होंने मुख्य शिक्षा अधिकारी (सीईओ) को प्रस्ताव भेजा था। निरीक्षण के बाद सीईओ ने सहमति प्रदान की, जिसके उपरांत यह कार्य शुरू किया गया।
मुख्य शिक्षा अधिकारी केएस रावत ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अच्छी पहल होने के कारण इसे संस्तुति प्रदान की गई है।
विद्यालय में शुरू की गई यह पहल न केवल हरियाली बढ़ाएगी, बल्कि विद्यार्थियों को प्रकृति से जुड़ने, पर्यावरण संरक्षण का महत्व समझने और आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाने के लिए भी प्रेरित करेगी।

