अतुल्य भारत चेतना (मनीष त्रिपाठी)
कौशांबी। जनपद के सिराथू तहसील अंतर्गत मोहब्बतपुर अनेठा गांव से एक बेहद मार्मिक मामला सामने आया है, जिसने पूरे क्षेत्र को भावुक कर दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गांव निवासी शिव लखन बीते 06 जनवरी 2026 की शाम खेत से काम करके घर लौट रहे थे। इसी दौरान रास्ते में पड़ने वाली ससुर खदेरी नदी के किनारे उन्हें किसी नवजात शिशु के रोने की आवाज सुनाई दी। आवाज की दिशा में जाकर देखने पर शिव लखन स्तब्ध रह गए। कड़कड़ाती ठंड में नदी के किनारे निर्वस्त्र अवस्था में एक नवजात शिशु पड़ा हुआ था।

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मानवीय संवेदना दिखाते हुए शिव लखन तुरंत उस नवजात को अपने घर ले आए और उसकी देखभाल शुरू की। उल्लेखनीय है कि शिव लखन के कोई संतान नहीं है, ऐसे में अचानक बच्चे के मिलने से उनके परिवार में खुशी का माहौल बन गया। परिवार के लोगों ने नवजात को ईश्वर का वरदान मानते हुए उसे अपनाने का मन बना लिया।
हालांकि, 07 जनवरी 2026 की शाम जब इस घटना की सूचना मंझनपुर पुलिस को मिली, तो पुलिस टीम शिव लखन के घर पहुंची। नियमानुसार कार्रवाई करते हुए पुलिस नवजात शिशु को अपने संरक्षण में लेकर चिल्ड्रन होम, मंझनपुर ले गई।
इसके बाद शिव लखन और उनके परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवारजनों का कहना है कि वे उस बच्चे के बिना अब नहीं रह सकते। पुलिस द्वारा बच्चे को ले जाने के बाद से परिवार ने खाना-पीना तक छोड़ दिया है और उनका कहना है कि जब तक उन्हें बच्चा वापस नहीं मिलेगा, वे अन्न ग्रहण नहीं करेंगे।
शिव लखन ने भावुक होकर कहा कि वे उस नवजात का पूरी जिम्मेदारी के साथ पालन-पोषण करने को तैयार हैं और अपनी चल-अचल संपत्ति का वारिस भी उसी बच्चे को बनाना चाहते हैं। उनका कहना है कि बच्चा अब उनके परिवार का हिस्सा बन चुका है और उसे उनसे अलग करना अन्याय है।
यह मामला अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर कानून और बाल संरक्षण के नियम हैं, तो दूसरी ओर एक निसंतान परिवार की भावनाएं और मानवीय संवेदना। अब देखना यह है कि प्रशासन और बाल कल्याण समिति इस संवेदनशील मामले में आगे क्या निर्णय लेती है।

