माघ मास 4 जनवरी से प्रारम्भ , गर्म वस्त्रों ,तिल का दान करने से उत्तम लाभ मिलता है – लवानिया
संवाददाता मनमोहन गुप्ता भरतपुर
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डीग – डीग जिले के कस्बा कामां कामवन धाम स्थित तीर्थराज विमलकुण्ड पर सम्पूर्ण मास हजारों भक्त परिक्रमा व डण्डोती करेंगे !
हिंदू धर्म में जप-तप और व्रत आदि की दृष्टि से माघ मास का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. हिंदू मान्यता के अनुसार जिस पवित्र मास में प्रयागराज के संगम तट पर कुंभ और माघ मेला लगता है, उस पावन मास में में देवतागण देवलोक से पृथ्वी पर उतर कर आते हैं और संगम के पवित्र जल में स्नान करते हैं. देवताओं की उपस्थिति और आस्थावान लोगों के द्वारा किये जाने वाले जप, तप, व्रत और कल्पवास के पुण्य प्रभाव से यह पूरा क्षेत्र पवित्र हो जाता है. मन्दिर विमल बिहारी क़े सेवाअधिकारी संजय लवानिया ने बताया कि इस साल माघ मास 04 जनवरी 2026 से प्रारंभ होकर महीने की शुरुआत 01 फरवरी 2026 तक रहेगा.
इस महीने संकष्टी चतुर्थी व्रत, कालाष्टमी, मकर संक्रांति, स्वामी विवेकानंद जयंती, बसंत पंचमी, प्रदोष व्रत आदि महत्वपूर्ण पर्व और व्रत रखे जाएंगे।
माघ मास का हिन्दू धर्म में विशेष महत्व है। माघ मास से जुड़ी एक पौराणिक कथा भी है। पौराणिक कथा के अनुसार माघ मास में गौतम ऋषि ने इंद्रदेव को श्राप दिया था। क्षमा याचना करने पर गौतम ऋषि ने उन्हें माघ मास में गंगा में स्नान करके प्रायश्चित करने को कहा। तब इंद्रदेव ने माघ मास में गंगा में स्नान किया था, जिसके फलस्वरूप इंद्रदेव को श्राप से मुक्ति मिली थी। इसलिए इस मास में माघी पूर्णिमा और माघी अमावस्या के दिन स्नान करना पवित्र माना गया है।
माघ के महीने में पवित्र तीर्थराज विमलकुण्ड में स्नान करें। यदि यह संभव न हो तो घर में ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
माघ मास में प्रतिदिन गीता का पाठ करने से मन शांत रहता है। साथ ही भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और सुख-समृद्धि आती है।
माघ मास में भगवान विष्णु की पूजा में नित्य तिल अर्पित करने से व्यक्ति के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं।
इस मास में नित्य तिल खाकर जल में तिल मिलाकर स्नान करने से भी बहुत पुण्य मिलता है।
माघ के महीने में रोज सुबह-शाम तुलसी जी की पूजा जरूर करें।
ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।
माघ मास में गर्म वस्त्रों का दान और तिल का दान उत्तम लाभ देता है।
माघ मास में कभी भी तामसिक चीजों जैसे मांसाहार, शराब का सेवन न करें।
इस माह में मूली का सेवन भी वर्जित है।
धार्मिक शास्त्रों के अनुसार माघ के महीने में मूली का सेवन करना शराब पीने के समान माना गया है।

