जयपुर। राजस्थान की राजधानी और ‘पिंक सिटी’ के नाम से मशहूर यह शहर, न केवल अपनी ऐतिहासिक इमारतों और किलों के लिए जाना जाता है, बल्कि यहां स्थित प्राचीन और आधुनिक मंदिर भी देश-दुनिया के पर्यटकों और श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं। ये मंदिर न सिर्फ धार्मिक महत्व रखते हैं, बल्कि इनकी वास्तुकला, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत भी अनोखी है। हाल के वर्षों में, जयपुर के इन मंदिरों में पर्यटकों की संख्या में वृद्धि देखी गई है। इस लेख में हम जयपुर के कुछ सबसे प्रसिद्ध मंदिरों पर विस्तार से चर्चा करेंगे, उनकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, महत्व, वास्तुकला और दर्शन के समय सहित।
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गलता जी मंदिर (मंकी टेम्पल)
गलता जी मंदिर जयपुर के बाहरी इलाके में अरावली पहाड़ियों के बीच स्थित है और इसे ‘मंकी टेम्पल’ के नाम से भी जाना जाता है। यह जयपुर का सबसे पुराना मंदिर है और रामानुज संप्रदाय के लिए विशेष महत्व रखता है। मंदिर का इतिहास प्राचीन है, जहां संत रिषि गलाव की तपोभूमि मानी जाती है। यहां सात प्राकृतिक कुंड हैं, जिनमें से गलता कुंड सबसे पवित्र है और कभी सूखता नहीं। मकर संक्रांति पर हजारों श्रद्धालु यहां स्नान करने आते हैं। मंदिर की वास्तुकला में कई मंदिर, पवित्र कुंड और मंडप शामिल हैं। यहां बड़ी संख्या में बंदर रहते हैं, जो पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं। दर्शन का समय: सुबह 5:00 बजे से रात 9:00 बजे तक। प्रवेश निःशुल्क है, लेकिन कैमरा के लिए 50 रुपये शुल्क।
बिरला मंदिर (लक्ष्मी नारायण मंदिर)
बिरला मंदिर जयपुर के मोती डूंगरी पहाड़ी पर स्थित है और इसे लक्ष्मी नारायण मंदिर भी कहा जाता है। इसकी स्थापना 1988 में बिरला परिवार द्वारा की गई थी। मंदिर भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी को समर्पित है, जो धन और समृद्धि के प्रतीक हैं। सफेद संगमरमर से निर्मित यह मंदिर तीन ऊंचे शिखरों वाला है, जिसमें भगवद्गीता के दृश्यों और उद्धरणों को दीवारों पर उकेरा गया है। यह सभी धर्मों के लोगों के लिए खुला है और यहां की शांति मन को सुकून देती है। दर्शन का समय: सुबह 6:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक और शाम 3:00 बजे से रात 9:00 बजे तक।
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गोविंद देव जी मंदिर
गोविंद देव जी मंदिर जयपुर के सिटी पैलेस परिसर में स्थित है और वैष्णव समुदाय के लिए विशेष महत्व रखता है। मंदिर की मूर्ति वृंदावन से लाई गई थी, जिसे मुगलों से बचाने के लिए राजा सवाई जय सिंह द्वितीय द्वारा यहां स्थापित किया गया। यह भगवान कृष्ण के सात मंदिरों में से एक है और माना जाता है कि मूर्ति कृष्ण के अवतार जैसी दिखती है। यहां सुबह मंगला आरती और रात में शयन आरती होती है। मंदिर की वास्तुकला राजस्थानी शैली की है। दर्शन का समय: सुबह 4:30 बजे से रात 9:00 बजे तक।
मोती डूंगरी गणेश मंदिर
मोती डूंगरी गणेश मंदिर एक छोटी पहाड़ी पर स्थित है और इसे स्कॉटिश किले जैसी संरचना से घेरा गया है। मूर्ति 500 वर्ष पुरानी है, जिसे गुजरात से लाया गया था। यह गणेश जी का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है, जहां बुधवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। अनोखी बात यह है कि यहां गणेश जी की सूंड दाईं ओर मुड़ी हुई है। वास्तुकला नागर शैली की है। दर्शन का समय: सुबह 5:00 बजे से रात 9:00 बजे तक।
गढ़ गणेश मंदिर
गढ़ गणेश मंदिर नाहरगढ़ और जयगढ़ किलों के पास अरावली पहाड़ियों पर स्थित है। इसे महाराजा सवाई जय सिंह ने शहर की स्थापना से पहले बनवाया था। यहां गणेश जी की मूर्ति बाल रूप (विग्रह पुरुषाकृति) में है, बिना सूंड के। गणेश चतुर्थी पर यहां पांच दिवसीय मेला लगता है। मंदिर से जयपुर शहर का मनोरम दृश्य दिखता है। दर्शन का समय: सुबह 5:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक और शाम 4:00 बजे से 7:00 बजे तक।
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अक्षरधाम मंदिर
अक्षरधाम मंदिर वैशाली नगर में स्थित है और भगवान नारायण को समर्पित है। यह अपेक्षाकृत नया मंदिर है, लेकिन अपनी शानदार वास्तुकला और सांस्कृतिक विरासत के लिए प्रसिद्ध है। यहां की नक्काशी और मूर्तियां मन मोह लेती हैं। मंदिर चारों ओर हरियाली से घिरा है और शांति प्रदान करता है। दर्शन का समय: सुबह 9:30 बजे से शाम 7:30 बजे तक।
तारकेश्वर महादेव मंदिर
तारकेश्वर महादेव मंदिर चौरा रास्ता में स्थित है और भगवान शिव को समर्पित है। यह 1784 में बनाया गया था और शिवलिंग काले पत्थर का है, जिसका व्यास 9 मीटर है। सावन में यहां कांवड़ यात्रा समाप्त होती है। महाशिवरात्रि पर बड़ी भीड़ उमड़ती है। वास्तुकला में संगमरमर का फर्श और सोने की तस्वीरें शामिल हैं। दर्शन का समय: सुबह 5:30 बजे से शाम 7:30 बजे तक।
जगत शिरोमणि मंदिर
जगत शिरोमणि मंदिर आमेर किले के पास स्थित है और महारानी कनकवती द्वारा 1599-1608 में बनवाया गया था। यह भगवान विष्णु और कृष्ण को समर्पित है और मीरा बाई की पूजी गई मूर्ति यहां है। वास्तुकला में दो प्रवेश द्वार, गर्भगृह और मंडप शामिल हैं। दर्शन का समय: सुबह 6:00 बजे से शाम 7:00 बजे तक।
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जयपुर के ये मंदिर न केवल धार्मिक स्थल हैं, बल्कि शहर की जीवंत सांस्कृतिक पहचान भी हैं। यदि आप जयपुर घूमने जा रहे हैं, तो इन मंदिरों का दर्शन जरूर करें, जहां इतिहास, आस्था और सुंदरता का संगम मिलेगा।


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