अतुल्य भारत चेतना संवाददाता खुमेश यादव
नारायणपुर, 06 दिसम्बर 2025 // कृषि विज्ञान केंद्र नारायणपुर में 05 दिसम्बर को विश्व मृदा दिवस उत्साह और जागरूकता के साथ मनाया गया। “Healthy Soil for Healthy Cities” थीम पर आधारित इस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों में मृदा स्वास्थ्य संरक्षण की समझ विकसित करना और भूमि की उर्वरता बनाए रखने के वैज्ञानिक उपायों को प्रोत्साहित करना था। विशेषज्ञों ने बताया कि नियमित मृदा परीक्षण से किसान कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं और मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक सुरक्षित रहती है।
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कार्यक्रम में वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. दिब्येंदु दास ने मृदा स्वास्थ्य का महत्व, मृदा परीक्षण की प्रक्रिया और फसल चक्र अपनाने के लाभ पर विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने कहा कि स्वस्थ मृदा ही स्वस्थ फसल और समृद्ध किसान की नींव है, तथा ऐसे आयोजनों से किसानों को व्यवहारिक और उपयोगी ज्ञान मिलता है जो उन्हें टिकाऊ कृषि अपनाने के लिए प्रेरित करता है।
कृषि महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. नवीन मरकाम ने समन्वित कृषि प्रणाली के माध्यम से मृदा स्वास्थ्य संतुलन बनाए रखने के उपाय बताए। इसके पश्चात डॉ. देवेंद्र कुर्रे ने जैविक खाद, हरी खाद के उपयोग तथा संतुलित पोषण प्रबंधन पर विस्तृत जानकारी प्रदान की।
कार्यक्रम में केंद्र के कार्यक्रम सहायक श्री इंद्र कुमार केमरो, डॉ. विवेक विश्वकर्मा, श्री राकेश साहू, श्री रवित पोयम, श्री जयराम वड्डे सहित ग्रामीण क्षेत्रों से आए किसान, कृषि महाविद्यालय के विद्यार्थी और केंद्र के कर्मचारी उपस्थित रहे। किसानों ने मिट्टी संरक्षण, जैविक खेती, पोषक तत्व प्रबंधन और जल संरक्षण से जुड़े प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों द्वारा समाधान किया गया।

