शहडोल जिले के अंतिम छोर पपौंध क्षेत्र में सरकारी लापरवाही का बड़ा उदाहरण सामने आया है। यहां उप तहसील भवन तो बना दिया गया, लेकिन आज इसकी हालत खंडहर जैसी हो चुकी है। स्थिति यह है कि तहसीलदार को उप तहसील भवन होने के बावजूद ग्राम पंचायत भवन में बैठकर लोगों की समस्याएं सुननी पड़ रही हैं, क्योंकि मूल भवन जर्जर, वीरान और उपयोग योग्य नहीं है।
सरकारी भवन खंडहर—न कुर्सियां, न सुविधा, न व्यवस्था उप तहसील भवन में न कुर्सियां बची हैं, न बैठने की व्यवस्था। पूरा परिसर वीरान पड़ा है। सरकारी पैसे से बना भवन आज उपयोग में नहीं आ रहा, जिससे क्षेत्रीय लोगों में भारी आक्रोश है।
क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि मौन—क्यों नहीं हो रही मरम्मत? ग्रामीणों का सवाल है कि विधायक और स्थानीय नेता आखिर कब तक आंखें बंद किए रहेंगे? क्या सरकारी पैसों की कोई कीमत नहीं? यदि भवन बनाया गया था, तो उसे सुरक्षित रखकर उपयोग में लेना शासन-प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए थी।
हफ्ते में एक दिन तहसीलदार की सुनवाई फिर भी भवन वीरान तहसीलदार सप्ताह में एक दिन टीम सहित पपौंध पहुंचकर सुनवाई करते हैं, लेकिन उप तहसील भवन बदहाल होने के कारण उन्हें ग्राम पंचायत में ही बैठना पड़ता है। इससे कामकाज पर असर पड़ रहा है और ग्रामीणों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
शासन–प्रशासन की बड़ी चूक उजागर उप तहसील भवन बनने के बाद भी उसका उपयोग न होना, ग्रामीण विकास और प्रशासनिक गंभीरता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। ग्रामीणों ने मांग की है कि खंडहर बने भवन की तत्काल मरम्मत कर इसे उपयोग योग्य बनाया जाए, ताकि सरकारी व्यवस्था सही दिशा में काम कर सके।

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