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Sun. Jan 11th, 2026

प्रयागराज के शंकरगढ़ में मंदिर को लेकर चल रहा विवाद

*शंकरगढ़ मंदिर विवाद — नायब तहसीलदार के साथ व्यापारियों की वार्ता, सिर्फ मंदिर की मांग*

रिपोर्ट आमिर मिर्ज़ा 

प्रयागराज। शंकरगढ़ नगर पंचायत में स्थित एक पुराने मंदिर को लेकर चल रहे विवाद के बीच नायब तहसीलदार राकेश यादव मौके पर पहुँचे और व्यापारियों के साथ बातचीत की। सोमवार को हुई इस बैठक में सैकड़ों व्यापारी और महिलाएं मौजूद थे। उन्होंने जय श्री राम के नारे लगाते हुए स्पष्ट किया कि उनकी एकमात्र मांग है कि मंदिर की जगह मंदिर ही बनना चाहिए। वही एक दो व्यापारियों ने कहा कि पहले यहाँ दुकान आगे और मंदिर पीछे था, और वे चाहते हैं कि दुकान का निर्माण भी हो। *हालांकि, अधिकांश व्यापारी और महिलाएं इस बात पर अड़े रहे कि सिर्फ मंदिर का ही निर्माण होना चाहिए* और किसी भी तरह का अवैध अतिक्रमण या दुकान निर्माण स्वीकार नहीं किया जाएगा। नायब तहसीलदार राकेश यादव ने सभी को सुनने के बाद आश्वासन दिया कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी। व्यापारियों ने इसके अलावा पूर्व में हुई अष्टधातु मूर्तियों की चोरी का मुद्दा उठाया। उनका आरोप है कि पुलिस ने चोरी की मूर्तियों को बरामद कर राजा साहब और उनके सहयोगियों को सौंपा था, लेकिन वे मूर्तियाँ अभी तक मंदिर नहीं पहुँची हैं। उन्होंने मांग की कि उन मूर्तियों के मंदिर तक न पहुँचने के कारणों की भी जांच होनी चाहिए। व्यापारियों ने चेतावनी दी कि अगर मंदिर की जगह पर अवैध अतिक्रमण या दुकान निर्माण हुआ तो वे सभी दुकानें बंद कर धरने पर बैठ जाएंगे और तब तक आंदोलन जारी रखेंगे जब तक मंदिर का निर्माण नहीं हो जाता। पूर्व चेयरमैन प्रतिनिधि अनिल केसरवानी ने व्यापारियों की मांग का समर्थन करते हुए कहा, राजा साहब और उनके सहयोगियों ने मंदिर तुड़वाते वक्त व्यापारियों से वादा किया था कि यहाँ भव्य मंदिर बनेगा। लेकिन वर्तमान निर्माण से यह स्पष्ट नहीं हो रहा कि मंदिर बन रहा है। यदि वे मंदिर नहीं बनवा सकते, तो उन्हें व्यापारियों के सामने स्पष्ट कहना चाहिए। अगर ऐसा होता है तो व्यापारी चंदा इकट्ठा करके खुद मंदिर का निर्माण करेंगे। इस मौके पर राजस्व निरीक्षक देवी शंकर तिवारी और लेखपाल विनय कुमार भी मौजूद थे। व्यापारियों ने मंदिर के 150 से 200 वर्ष पुराने इतिहास का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि 2011 में किसके आदेश पर नगर पंचायत में राजा साहब के नाम मंदिर और चार कमरे दुकान चढ़ा दिए गए थे। उन्होंने इस मामले की जांच की मांग की ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके। खबर लिखे जाने तक सैकड़ों व्यापारी दरी बिछाकर बजरंगबली की प्रतिमा के पास भजन-कीर्तन में जुटे हुए थे। वही व्यापारियों ने अयोध्या में श्री राम के टेंट में रहने का उदाहरण देते हुए आगे कहा कि उन्हें विश्वास है कि भाजपा सरकार उनकी आस्था और हिंदुओं की भावना को समझेगी और मंदिर की जगह मंदिर ही बनेगा। उन्होंने दोहराया कि जब अयोध्या में श्री राम टेंट में रह सकते हैं, तो यहाँ बजरंगबली की मूर्ति टेंट में क्यों नहीं रह सकती, बशर्ते अवैध अतिक्रमण और दुकान निर्माण न हो।

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News Desk

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