अतुल्य भारत चेतना
डॉ. मीरा पराड़कर
छिंदवाड़ा। राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय छिंदवाड़ा के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय वर्कशॉप “रसायन, जैव रसायन एवं भारतीय आयुर्वेदिक औषधीय पौधे” ने औषधीय वनस्पतियों की वैज्ञानिक एवं पारंपरिक उपयोगिता पर गहन चर्चा का मंच प्रदान किया। इस वर्कशॉप के दौरान आदर्श फाउंडेशन छिंदवाड़ा के संरक्षक एवं वृक्ष मित्र “हर्बल मैन” रविंद्र सिंह के नेतृत्व में एक विशेष सम्मान समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें प्रमुख अतिथियों को कालमेघ के पौधे का गमला भेंट किया गया। कालमेघ, जो आयुर्वेद में कड़वी दवा के रूप में जाना जाता है, लीवर रोगों एवं प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए प्रसिद्ध है। यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है, बल्कि छिंदवाड़ा क्षेत्र की समृद्ध औषधीय विरासत को भी उजागर करती है।

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प्रमुख अतिथियों का सम्मान: कालमेघ गमला के माध्यम से पर्यावरण संदेश
सम्मान समारोह में आदर्श फाउंडेशन के संरक्षक एवं प्रसिद्ध वृक्ष मित्र “हर्बल मैन” रविंद्र सिंह, अध्यक्ष महेश बंदेवार, डॉ. लता नागले, नलिन पूरी गोस्वामी, वैद्य राजा राजपूत, पंडित राजेश शर्मा, महेंद्र यादव एवं डिप्टी रेंजर राजेश्वर सिंह कुशवाह ने एकत्र होकर निम्नलिखित प्रमुख अतिथियों को कालमेघ के पौधे का गमला भेंट किया:

- प्रो. के. बी. पांडे: उत्तर प्रदेश पूर्व PSC, UPSC एवं उत्तर प्रदेश आयोग के पूर्व अध्यक्ष।
- प्रो. आई. पी. त्रिपाठी: राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय के कुलपति।
- डॉ. जे. के. वाहने: विश्वविद्यालय के कुलसचिव।
- युवराज पाटिल: विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार।

समापन एवं भविष्य की योजनाएं
तीन दिवसीय वर्कशॉप का समापन संकल्प के साथ हुआ, जहां प्रतिभागियों ने औषधीय पौधों की संरक्षण एवं वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने का संकल्प लिया। हर्बल मैंन रविन्द्र सिंह ने छिंदवाड़ा में पाए जाने वाले औषधीय पौधे की जानकारी प्रदान की, विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार युवराज पाटिल ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा, “आदर्श फाउंडेशन जैसे संगठनों का सहयोग हमारी शोध गतिविधियों को मजबूत बनाता है।” कुलसचिव डॉ. जे. के. वाहने ने भविष्य में ऐसे और वर्कशॉप आयोजित करने की घोषणा की।

