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Chhattisgarh news; रतनपुर में विजय दशमी के साथ RSS का शताब्दी उत्सव: पथ संचलन और धर्म जागरण के साथ हुआ भव्य आयोजन

अतुल्य भारत चेतना
प्रमोद कश्यप

रतनपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने की खुशी में विजय दशमी (दशहरा) के पावन अवसर पर पूरे देश में भव्य आयोजन किए। इस कड़ी में छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक नगरी रतनपुर में भी संघ के स्वयंसेवकों ने पथ संचलन और धर्म जागरण कार्यक्रम आयोजित कर उत्साहपूर्ण माहौल बनाया। कार्यक्रम का समापन नगर के सभी वार्डों में पथ संचलन के बाद हाईस्कूल प्रांगण में एक समारोह के साथ हुआ, जिसमें प्रमुख वक्ताओं ने हिंदू समाज के उत्थान और राष्ट्र सेवा पर जोर दिया।

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संघ की स्थापना का ऐतिहासिक संदर्भ

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना सन् 1925 में विजय दशमी के दिन ब्रिटिश शासन काल में डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा की गई थी। उस समय मुरझा रही हिंदू संस्कृति को पुनर्स्थापित करने के उद्देश्य से कुछ स्वयंसेवकों को साथ लेकर इस संगठन की नींव रखी गई। आज यह संगठन राष्ट्र सेवा और हिंदुत्व की ज्योति प्रज्वलित करने वाली एक विशाल वटवृक्ष के रूप में खड़ा है। शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में पूरे भारत में दशहरा से शुरू होकर तीन दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसमें पथ संचलन के माध्यम से धर्म जागरण का कार्य किया गया।

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रतनपुर में कार्यक्रम का विवरण

रतनपुर में विजय दशमी का पर्व ध्वज पूजन के साथ शुरू हुआ, जिसके बाद स्वयंसेवकों ने नगर के सभी वार्डों में पथ संचलन किया। यह संचलन तीन चरणों में आयोजित किया गया, जिसमें सैकड़ों की संख्या में स्वयंसेवक शामिल हुए। मार्गों पर स्थानीय निवासियों ने फूलों की वर्षा कर स्वयंसेवकों का उत्साहवर्धन किया, जिससे पूरा शहर उत्सवमय हो गया।

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पथ संचलन के उपरांत हाईस्कूल प्रांगण में समापन समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ प्रांत के मिलन प्रमुख गणपति रायल जी उपस्थित थे, जिन्होंने स्वयंसेवकों को राष्ट्र सेवा का पाथेय प्रदान किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता ऊदल यादव ने की, जबकि विशिष्ट अतिथि पंडित रामकृष्ण तिवारी थे।

प्रमुख वक्ताओं के विचार

समारोह में कई प्रमुख व्यक्तियों ने अपने विचार साझा किए:

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  • तृतीय वर्ष प्रशिक्षित स्वयंसेवक श्री तारकेश्वर पुरी जी महाराज: उन्होंने हिंदू धर्म के उत्थान पर जोर देते हुए संघ की भूमिका पर प्रकाश डाला।
  • नगरपालिका अध्यक्ष श्री लवकुश कश्यप: उन्होंने स्थानीय स्तर पर संघ के योगदान की सराहना की और समाज सेवा की आवश्यकता पर बल दिया।
  • पूर्व कृषि सभापति, जनपद पंचायत कोटा श्री भानुप्रताप कश्यप: उन्होंने हिंदू संस्कृति के संरक्षण और राष्ट्र निर्माण में संघ की भूमिका पर अपने विचार रखे।
  • पंडित रामकृष्ण तिवारी: अपने संबोधन में उन्होंने कहा, “सभी स्वयंसेवकों को प्रतिदिन संघ की शाखा में एक घंटा अवश्य आना चाहिए। समाज के बीच रहकर सेवा, समर्पण और बलिदान के साथ कार्य करना चाहिए। संघ का कार्य ईश्वरीय कार्य है। हिंदू समाज का संगठन सर्वोपरि है। सर्वस्पर्शी और सर्वव्यापी संगठन के माध्यम से कार्यकर्ता निर्माण करना इसका एकमात्र उद्देश्य है। देश और समाज के लिए काम करना, देश को सर्वोपरि मानकर चलना चाहिए। इससे देश के कल्याण के साथ चराचर जगत का कल्याण संभव है।”
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News Desk

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