पायलट आधार पर निजी सुरक्षा कर्मियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू
अतुल्य भारत चेतना
दिनेश सिंह तरकर
मथुरा। देश के बंदरगाहों की सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ एवं आधुनिक स्वरूप प्रदान करने की दिशा में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने एक नई पहल की है। पहली बार निजी सुरक्षा कर्मियों को प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया है। यह पहल देश में हाइब्रिड बंदरगाह सुरक्षा मॉडल की स्थापना को मजबूती प्रदान करेगी।

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जेएनपीए और सीएचपीए से हुआ शुभारंभ
यह कार्यक्रम एक साथ दो प्रमुख बंदरगाहों – जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह प्राधिकरण (जेएनपीए), मुंबई तथा चेन्नई बंदरगाह प्राधिकरण (सीएचपीए) में शुरू किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम की अवधि दो सप्ताह रखी गई है। इसके तहत प्रतिभागियों को बंदरगाह संचालन, खतरे की पहचान, आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र, अंतर्राष्ट्रीय जहाज एवं बंदरगाह-सुविधा सुरक्षा (आईएसपीएस) संहिता, तथा आधुनिक सुरक्षा उपकरणों के उपयोग की गहन जानकारी दी जाएगी।
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पहले चरण में 66 सुरक्षा कर्मी शामिल
प्रथम चरण में मुंबई केंद्र पर जेएनपीए, डीपीए कांडला और एमपीए मुंबई से कुल 40 निजी सुरक्षा कर्मी तथा चेन्नई केंद्र पर एनएमपीए, केपीएल, सीएचपीए और वीओसीपीए से कुल 26 निजी सुरक्षा कर्मी नामांकित हुए हैं। आने वाले महीनों में इस कार्यक्रम का दायरा बढ़ाकर अन्य बंदरगाहों तक भी विस्तारित किया जाएगा।

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उद्घाटन अवसर पर मिले संदेश
चेन्नई में आयोजित उद्घाटन समारोह में सीएचपीए अध्यक्ष सुनील पालीवाल (आईएएस) ने कहा कि यह पहल बंदरगाह सुरक्षा प्रबंधन को नई दिशा देगी और सुरक्षा प्रणाली को और सुदृढ़ बनाएगी। वहीं सीआईएसएफ दक्षिण खंड के महानिरीक्षक सरवनन (भापुसे) ने कहा कि केंद्रित और तकनीकी प्रशिक्षण से सुरक्षा कर्मियों को अपने कर्तव्यों का निर्वहन अधिक पेशेवर ढंग से करने में सहायता मिलेगी।

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वैश्विक परिप्रेक्ष्य में अहम कदम
इस अवसर पर सीआईएसएफ यूनिट आईओसी मथुरा के इकाई प्रभारी डॉ. नीरज भारती, कमांडेंट ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिदृश्य और समुद्री सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों को देखते हुए यह कदम अत्यंत महत्वपूर्ण है। हाल ही में देशभर के बंदरगाहों पर एमएआरएसईसी स्तर-2 लागू किया गया था, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय और सतर्कता की आवश्यकता और अधिक बढ़ गई है।

