Breaking
Mon. Jan 12th, 2026

जीवन का हर दिन दीपोत्सव की तरह मनायें- ब्रह्माकुमारी रेखा दीदी

अतुल्य भारत चेतना
हाकम सिंह रघुवंशी

विदिशा। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय चर्च वाली गली बरेठ रोड के पास स्थित सेवा केंद्र में दीपोत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया गया। ब्रह्माकुमारी रुक्मणी दीदी ने दीपावली का आध्यात्मिक अर्थ बताते हुए कहा कि दीपावली के दिन भारत के लोग दीप जलाकर अपने मकान और दुकानों को भी खूब रौशन करते हैं क्योंकि उनका ऐसा विश्वास है कि श्री लक्ष्मी अंधकार में नहीं आती परंतु वे नहीं जानते कि अंधकार से अभिप्राय रात्रि का अंधकार नहीं, न उजाले का अभिप्राय दीपक का उजाला है बल्कि अंधकार शब्द अज्ञानता का तथा उजाला शब्द ज्ञान प्रकाश का वाचक है। भाव यह है कि जब तक घर-घर में हर नर नारी का आत्मा रूपी दीपक नहीं जगता, उनकी बुद्धि में ज्ञान रूपी प्रकाश नहीं होता, उनके मन से तमोगुण मिटकर सतोगुण स्थापित नहीं होता तब तक श्री लक्ष्मी नहीं पधार सकती क्योंकि देवी और देवता का अंधकार में वास नहीं होता।

दूसरी मान्यता यह भी है कि दीपावली के अवसर पर लोग अपने हिसाब-किताब की पुराने बहीखाते बंद करते हैं। जो नया बही खाता खोलते हैं, वह भी वास्तव में संगमयुग की याद दिलाता है जब परमपिता परमात्मा ने मनुष्य आत्माओं को ईश्वरीय ज्ञान दिया तो उन्होंने अपने पुराने कर्मों और संस्कारों का लेखा-जोखा समाप्त करके शुभ कर्म करना प्रारंभ किया। यह संगमयुग की शुभ बेला है तो हमें चाहिए कि हम ज्ञान द्वारा आत्मा का दीप जगाएं और नए संस्कारों का खाता खोलें, और वास्तविकता यह है कि कलयुग के अंत में जब अज्ञान अंधकार छाया होता है तब ‘सदा जगती ज्योति’ परमात्मा अवतरित होकर प्रजापिता ब्रह्मा की ज्योति जगाते हैं और उन द्वारा अन्य मनुष्यात्माओं को भी प्रकाशित करते हैं उसके फलस्वरूप ही भारत में फिर से श्री लक्ष्मी और श्री नारायण का राज्य होता है। अतः दीपावली वास्तव में पुरुषोत्तम संगमयुग का ही स्मरणोत्सव है। ब्रह्माकुमारी रेखा दीदी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि जब हमारी आत्मा की ज्योति जग जाती है यानी कि जब हम सब इच्छाओं से परे हो जाते हैं तब हमारी स्थिति शांत और स्थिर हो जाती है। उसके प्रतिफल हम दूसरे का आत्मदीप जलाने के योग बन जाते हैं। परिणाम स्वरुप ना तो हमारे से गलत कर्म होता है और ना ही हमारे अंदर किसी के प्रति नफरत, ईर्ष्या होती है। जिस कारण हमारा हर दिन दीपावली उत्सव में बीतता है इस आध्यात्मिकता को आप भी सोचे, समझे और जीवन में हर दिन को उत्सव की तरह मनाएं अधिक संख्या में माता बहनों ने कार्यक्रम का लाभ लिया।

Author Photo

News Desk

Responsive Ad Your Ad Alt Text
Responsive Ad Your Ad Alt Text

Related Post

Responsive Ad Your Ad Alt Text