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आलू व सरसों की फसलों झुलसा एवं माहू कीट का समय से निदान करें कृषकः प्रियानन्दा

आलू व सरसों की फसलों झुलसा एवं माहू कीट का समय से निदान करें कृषक: प्रियानन्दा

सूरज कुमार तिवारी

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संवाददाता बहराइच

बहराइच 26 दिसम्बर दिन शुक्रवार। जिला कृृषि रक्षा अधिकारी प्रियानन्दा ने वर्तमान समय में मौसम के तापमान में उतार चढाव एवं बदली छायी रहने के कारण आलू में झुलसा (ब्लाइट) बीमारी की सम्भावना बढ जाती है। झुलसा (ब्लाइट) रोग दो प्रकार का होता है पहला अगेती झुलसा दूसरा पिछेती झुलसा। आलू की फसल में पौधे जलने की समस्या अगेती झुलसा रोग के कारण होती है। इस रोग की शुरूआत दिसम्बर से जनवरी माह में होती है। झुलसा (ब्लाइट) बीमारी के लगने की दशा में आलू की पत्तियॉ सूखने लगती है एवं गोल या अण्डाकार भूरे रंग के छल्लेयुक्त चक्कतें पड जाते है। चक्कतें धीरे-धीरे बढने लगते है और पौधा मर जाता है। इस बीमारी के लक्षण दिखाई देने की दशा में किसान भाई मैनकोजेब 75 प्रति0 डब्लू.पी. की 2 कि0ग्रा0 प्रति हेक्टेयर अथवा कॉपरआक्सीक्लोराइड 50 प्रति0 की 2.5 किग्रा0 मात्रा 800-1000 लीटर पानी में मिलाकर प्रति हैक्टेयर की दर से छिडकाव करें तथा आवश्यकतानुसार 15 दिन के अन्तराल पर दोबारा प्रयोग करें।

वर्तमान समय में तापमान के बदलाव के कारण सरसो की फसल में माहू कीट लगने की सम्भावना बढती है। इस कीट के शिशु एवं प्रौंढ पौधो के कोमल तनो, पत्तियो एवं फूलो के रस चूसकर उन्हे कमजोर कर देते है साथ ही रस चूसते समय पत्तियो पर मधुश्राव भी करते है, जिसपर काले कवक का प्रकोप होता है और प्रकाश संश्लेषण की क्रिया बाधित होती है। इस रोग का प्रकोप दिसम्बर से मार्च तक बना रहता है। जनवरी के प्रथम सप्ताह में जहॉ कीट के समूह दिखाई दें उन टहनियो को तोड कर अलग कर देना चाहिए। खेत में इस कीट का आक्रमण लगभग 20 प्रतिशत हो जाने की दशा में एजाडिरेक्टिन 0.15 प्रति ई.सी. (नीम आयल) 2.5 मिली0/लीटर पानी अथवा इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रति0 ई.सी. की 0.5 मिली0/लीटर पानी के साथ अथवा क्लोरपायरीफॉस 20 प्रतिशत ई.सी. की 2.5 मिली0/लीटर पानी के साथ मिलाकर छिडकाव करें। सरसो में सफेद गेरूई रोग से बचाव हेतु मैनकोजेब 75 प्रति0 डब्लू.पी. की 2 किग्रा0 मात्रा 500-600 लीटर पानी में मिलाकर प्रति हैक्टेयर की दर से छिडकाव करें।

वर्तमान समय में गेंहू की फसल में सकरी पत्ती के खरपतवार हेतु सल्फोसल्फयूरॉन 75 प्रति डब्लू.जी की 33 ग्राम मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से तथा चौडी पत्ती के खरपतवार हेतु 2-4 सोडियम साल्ट 80 प्रति0 की 625 ग्राम मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करें। गेंहू की फसल में चौडी एवं सकरी पत्ती के खरपतवार हेतु सल्फोसल्फयूरॉन 75 प्रति $ मेट सल्फयूरॉन 20 प्रति की 40 ग्राम मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से बुवाई के 25-30 दिन के अन्दर पहली सिचाई के बाद प्रयोग करें।

किसान भाई किसी भी समस्या/सुझाव हेतु अथवा कीट/रोग के लगने की दशा में रोगग्रस्त फसल/पौधे के फोटो के साथ विभागीय पी.सी.एस.आर.एस. नम्बर 9452247111 एवं 9452257111 पर व्हाटसएप अथवा टेक्सट मैसेज के माध्यम से शिकायत कर सकते है। किसान भाईयो को समस्या लिखते समय अपना पूरा नाम व पूरा पता (ग्राम, विकासखण्ड एवं तहसील आदि का नाम) भी अंकित करना होगा। समस्या का समाधान 48 घण्टे के भीतर कर दिया जाएगा।

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सूरज तिवारी

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