पण्डित ज्वालाप्रसाद रंगजी मन्दिर वृन्दावन के सानिध्य में नेपाल से आये कृष्ण भक्तों ने किए कामवन धाम के दर्शन
रिपोर्टर मनमोहन गुप्ता भरतपुर
इसे भी पढ़ें (Read Also): वेदनिधि फाउंडेशन द्वारा आयोजित किया प्राथमिक चिकित्सा प्रशिक्षण शिविर
नेपाल के सैकड़ों कृष्ण भक्तों ने किये दर्शन व पूजन
कामां – पण्डित ज्वालाप्रसाद रंगजी मन्दिर वृन्दावन के सानिध्य में नेपाल से आये कृष्ण भक्तों ने किये श्री विमल बिहारी जी दर्शन। मंदिर श्री विमल बिहारी जी के सेवाधिकारी संजय लवानियां ने माहात्म्य सुनाते हुए बताया क़ि गर्ग संहिता के अनुसार श्रीकृष्ण ने राजा विमल की 16 हजार 100 कन्याओं से विवाह किया।
भगवान श्रीकृष्ण के माता-पिता तीर्थ यात्रा पर जाना चाहते थे। वह बुजुर्ग थे, इसलिए भगवान श्रीकृष्ण ने सभी देवी-देवताओं को कामवन में बुलाया तथा समस्त तीर्थों को स्थापित किया। पुष्कर राज नहीं आये तो श्रीकृष्ण ने इसे तीर्थराज घोषित कर दिया। पुष्कर राज को अपनी गलती का अहसास हुआ तब श्रीकृष्ण के कहने पर वह अपना पुण्य फल तीर्थराज विमलकुण्ड को दे गया। कहा जाता है कि विमलकुण्ड में एक बार स्नान व पुष्कर में सात बार स्नान करने पर बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है तथा तभी से सभी देवी-देवता यहां वास करते हैं।
विष्णु पुराण में लिखा है़ कि तीर्थराज विमलकुण्ड के दर्शन मात्र से मेरु पर्वत के समान पापकर्म नष्ट हो जाते हैं इसके दर्शन के लिये देवता भी तपस्या से भी समर्थ नही हो पाते ।श्री कृष्ण लीलाओं के अनन्त जीवन्त चिन्ह भक्तों की आस्था व श्रद्धा को असीमित कर देते हैं । तीर्थराज के स्वच्छ जल में स्नान व आचमन करने से असीम पुण्य फल प्राप्त होता है।
तीर्थराज विमलकुण्ड करोड़ों कृष्ण भक्तों की आस्था का केन्द्र है़ जिसके दर्शनार्थ वर्षभर लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं ।
सभी भक्तों ने कामवन विराजित तीर्थराज विमलकुण्ड ,विमल बिहारी जी सहित श्रीकृष्ण की क्रीड़ास्थलियों क़े दर्शन किये।

