भागवत कथा का चतुर्थ दिवस; पाप संकट मौत अनहोनी ओर यमराज भी वापस भाग जाएंगे अगर आपके पास पुण्य है – पं नागर
कथा में श्री कृष्ण जन्मोत्सव के लिए पंडाल को फूलों से सजाकर धूमधाम मनाया।
70 हजार स्क्वेयर फिट का पंडाल भी छोटा पड़ा
1988 में पहली बार पंडित कमलकिशोर जी नागर की कथा हुई थी तिलगारा में

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अतुल्य भारत चेतना | विजय द्विवेदी
बदनावर
बदनावर। समय तो साथ देता है अगर शरीर साथ दे तो भगवान के भजन में लगाना । बहुत कम लोग होते हे जिनका समय ओर शरीर ठीक रहता है समय रहते अच्छे काम निपटालना क्योंकि अच्छा समय कम ही मिलता हैं।

शरीर में दुख होगा तो चलेगा लेकिन दोष नहीं होना चाहिए यह बात तिलगारा में चल रही भागवत कथा के चौथे दिन पंडित कमलकिशोर जी नागर ने कही । साथ ही भागवत के माहात्म्य के वर्णन करते हुए कहा कि आज फालतू के काम जिंदगी गवा रहे लोग। झूठ कपट पाखंड से घिरते जा रहे हे इससे छुटकारा पाने के लिए मनुष्य की अवगुणों को छोड़ कर धर्म के रास्ते पर चलना पड़ेगा और भागवत कथा श्रवण करके उसका चिंतन करना पड़ेगा क्योंकि व्यास पीठ ने कितनो को ही सुधार दिया है। सत्संग वायु तत्व समान हे जो नजर नहीं आता। जिंदगी में कभी भी अपने लक्ष्य से मत भटकना क्योंकि दुनिया टांग खींचने वालों से भरी पड़ी है।
पाप यमराज संकट और मौत भी वापस चली जाएगी अगर आप के पाप पुण्य है।आज यमराज भी देखते आपने जीवन में क्या काम किया कितना दान धर्म भजन और प्रार्थना की है आज के समय में दिखावे का समय चल रहा है। मन से कभी सच्ची भगवान की भक्ति नहीं है टोने टोटके के भरोसे बैठा है इंसान। अगर मन से भगवान की भक्ति की होती तो आज टोने टोटके की जरूरत नहीं पड़ती। प्याज का काम रुलाना ही है उसे प्रेम से काटो या द्वेष से ।
जिस प्रकार ग्यारस के एक दिन पहले ही उपवास की तैयारी मूंगफली के दाने निकालकर करते हे उसी प्रकार जीवन को अमूल्य समझ कर भजन भक्ति धर्म के रास्ते पर चल कर परलोक जाने की तैयारी कर लेना चाहिए। ताकि मरने के बाद दूसरे को ग्यारस करने की आवश्यकता न पड़े।
परमात्मा को धन दौलत प्रसाद नारियल की आवश्यकता नहीं है भगवान को भाव के भूखे है उन्हें केवल विनम्रता से विनती करनी चाहिए। कभी कभी प्रेम और करुणा से कि गई प्रार्थना भी काम कर जाती है।ये चढ़ावा मंतर तंतर दिखावे से कुछ नहीं होता। भगवान को अपनी आत्म से निकले गहरे अनुराग को प्रकट करो।
कथा में श्री कृष्ण जन्मोत्सव के लिए पूरे पंडाल को फूलों से सजाकर धूमधाम से मनाया। कथा पंडाल में पुष्प वर्षा की गई।
रात्रि में जाप के लिए बड़ी संख्या में आस पास के गांवों से पहुंच रहे लोग।
दूर से आए करीब डेढ़ से दो हजार श्रोता पंडाल में ही रात्रि विश्राम करते है। आयोजक समिति द्वारा रुके हुए श्रोताओं के लिए चाय नाश्ता तथा भोजन की व्यवस्था की गई।

