एक घड़ी आधो घड़ी
आधो के पुनि आध।
तुलसी चर्चा राम की
कटै कोटि अपराध।।
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भगवान का नाम यद्यपि मनुष्य जीवन के लिए हितकारी है। एक सेकंड का भगवन्नाम ही करोड़ों पापों का कर देता है। फिर भी वर्णाश्रम मर्यादा का पालन करते हुए यदि नाम न लिया जाए तो वह मनुष्य का परम कल्याण नहीं करता। यह ठीक है कि अजामिल ने पुत्र के नाम ‘नारायण’ से ही कल्याण प्राप्त किया, परन्तु वह पहले स्वधर्म का पालन अवश्य करता था। धर्म शास्त्र सम्मत पवित्र आचरण करते हुए दिल से लिया गया भगन्नाम ही मनुष्य के पापो को दूर करता है।आज नवधा रामायण, श्रीमद्भागवत पुराण, गीता, शिव महापुराण आदि की कथाएं जगह जगह हो रही है। इनका प्रचार भी बहुत हो रहा है, इसके बाद भी नास्तिकता, उच्श्रृंखलता तथा शास्त्रो में अविश्वास की वृद्धि हो रही है।
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अधिकांश व्यक्ति धार्मिक आडम्बर एवं दिखावा करते ही दिखाई देते हैं। और इसीलिए ही आज समाज में नैतिकता एवं चारित्रिक दृष्टि से सुधार नहीं हो पा रहा है। ऐसी स्थिति में जहां एक ओर भगवन्नाम की चर्चा होती है, कथाएं होती है, वहां स्वधर्म पालन , नैतिकता एवं चरित्र सुधार के बारे में भी चर्चा होनी चाहिए और सख्ती से उसका पालन होना चाहिए।स्वल्पमप्यस्य त्रायते महतो भयात। स्वधर्म का थोड़ा भी अनुष्ठान महाभय से मुक्त करता हआज देश के किशोर,नवयुवा धर्म से और धार्मिक वातावरण से हटते चले जा रहे हैं।
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और इसी कारण से वे विभिन्न अपराधिक गतिविधियों में शामिल हो जाते हैं। एक ओर रामनाम की महिमा गाई जाती है, तो दूसरी ओर शिखा-सूत्र को भी जलांजलि दे दी जाती है। शिखा सूत्र विहिन जो भी कर्म किए जाते हैं, सब निष्फल हो जाते हैं।अतः स्वधर्म पालन करते हुए हरिनाम स्मरण ही पूर्ण कल्याणप्रद हो सकता है। यह निर्विवाद सत्य है।
आलेख– प्रमोद कश्यप, रतनपुर
