अतुल्य भारत चेतना (मनीष त्रिपाठी)
कौशांबी। जिले के प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र, जिला अस्पताल कौशांबी में स्वास्थ्य तंत्र की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। सूत्रों के अनुसार अस्पताल में माली पद पर तैनात कर्मचारी नीतू सिंह पर बेहद गंभीर और चौंकाने वाले आरोप लगे हैं, जो यदि सही पाए जाते हैं तो यह मामला सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि संगठित भ्रष्टाचार और स्वास्थ्य माफिया की साजिश की ओर इशारा करता है।
सूत्रों का दावा है कि नीतू सिंह, जिनकी जिम्मेदारी केवल अस्पताल परिसर की साफ-सफाई और देखरेख तक सीमित है, वह कथित तौर पर लेबर रूम में अवैध रूप से हस्तक्षेप करती रही हैं और गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी कराती रही हैं। बिना किसी चिकित्सकीय प्रशिक्षण या योग्यता के इस प्रकार की गतिविधि न केवल कानून का खुला उल्लंघन है, बल्कि इससे मां और नवजात शिशु दोनों की जान को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।
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प्राइवेट अस्पतालों से सांठगांठ का आरोप
मामला यहीं तक सीमित नहीं है। सूत्रों के अनुसार नीतू सिंह पर यह भी आरोप है कि वह गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों को गुमराह कर जिला अस्पताल से प्राइवेट अस्पतालों में भेजने का काम करती हैं, जहां कमीशन के आधार पर डिलीवरी कराई जाती है। इस पूरे नेटवर्क के पीछे मोटे आर्थिक लेन-देन की बात सामने आ रही है, जिससे गरीब और मजबूर मरीजों का शोषण किया जा रहा है।
पति की भूमिका पर भी उठे सवाल
सबसे गंभीर आरोप यह है कि जिस निजी अस्पताल में मरीजों को भेजा जाता है, उसमें नीतू सिंह के पति शैलेंद्र सिंह की साझेदारी (पार्टनरशिप) होने की चर्चा है। यदि यह तथ्य जांच में सही साबित होते हैं, तो यह मामला व्यक्तिगत लाभ, कमीशनखोरी और संगठित स्वास्थ्य माफिया के गठजोड़ का स्पष्ट उदाहरण बन सकता है।
पहले भी हो चुकी हैं शिकायतें
स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों का कहना है कि नीतू सिंह की मनमानी और संदिग्ध गतिविधियों को लेकर पहले भी शिकायतें की गई थीं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग द्वारा उन्हें गंभीरता से नहीं लिया गया। इससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या सब कुछ अधिकारियों की जानकारी में होते हुए भी अनदेखा किया जा रहा है?
जांच और कार्रवाई की मांग
अब जिलेभर में यह चर्चा तेज है कि आखिर किसके संरक्षण में यह पूरा खेल चल रहा है। आम जनता और सामाजिक संगठनों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच, लेबर रूम की सीसीटीवी फुटेज की जांच, और आरोपी कर्मचारी सहित पूरे नेटवर्क पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
जनता का सवाल साफ है—
क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही प्रशासन जागेगा?
क्या मां और बच्चे की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों को सजा मिलेगी या मामला दबा दिया जाएगा?
अब निगाहें स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वे इस गंभीर प्रकरण में कब तक चुप्पी साधे रहते हैं या फिर जनता के दबाव में कोई ठोस कार्रवाई करते हैं।

