कामां कामवन धाम मेबदेश – विदेश से रोजाना आने वाले पर्यटकों हेतु नहीं कोई बुनियादी सुविधाएं,
संवाददाता मनमोहन गुप्ता भरतपुर
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सामाजिक कार्यकर्ता ने भेजा पुरातत्व विभाग के अधीक्षक को पत्र
डीग – डीग जिला के कस्बा कामां के गयाकुण्ड मौहल्ला निवासी सामाजिक कार्यकर्ता विजय मिश्रा ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग जयपुर के अधीक्षक को एक पत्र लिखकर जिला डीग के कार्यों में स्थित भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के चौरासी खम्भा देखने आने वाले पर्यटकों के लिये पीने के पानी एवं बैठने की व्यवस्था और सार्वजनिक शौचालय निर्माण करवाने की मांग की है. मिश्रा ने अपने पत्र में कहा है कि राजस्थान के नवगठित जिला डीग उपखण्ड कामाँ के प्राचीन ऐतिहासिक चौरासी खम्भा भास्तीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अन्तर्गत संरक्षित है, जिनको देखने के लिये प्रतिदिन
सैंकडों की संख्या में देश-विदेशों से पर्यटक आते हैं. यहाँ पर पर्यटकों के लिये कोई भी जन सुविधा के रूप
आने वाले पर्यटकों के लिये पीने के पानी, बैठने व शौचालय आदि की मूलभूत सुविधा उपलब्ध नहीं है,
जिससे यहाँ पर आने वाले पर्यटकों को काफी परेशानी का सामना करना पड रहा है। कामाँ में स्थित भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के चौरासी खम्भा देखने आने वाले पर्यटकों के लिये पीने के पानी एवं बैठने को व्यवस्था और सार्वजनिक शौचालय निर्माण कराने की कृपा करें। जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। राजस्थान के डीग जिले में स्थित कामां का अत्यंत प्राचीन मंदिर अब चौरासी खम्भा मंदिर कहलाता है। यह बिना मूर्ति का महाभारत कालीन विष्णु मंदिर है। यह महाभारत के युद्ध से भी बहुत पहले अस्तित्व में था। डीग जिले में स्थित कामां पुराणकालीन मंदिर है तथा यह महाभारत के युद्ध से भी बहुत पहले अस्तित्व में था। पुराणों में इसका नाम ब्रह्मपुर बताया गया है। लोकमान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण के नाना कामसेन ने इस
स्गर का नाम ब्रह्मपुर से बदलकर कामां कर दिया। कुछ पुराणों में इस क्षेत्र का उल्लेख काम्यक वन के राम से किया गया है। मान्यता है कि अत्यंत प्राचीन काल में इस क्षेत्र में कदम्ब के पेड़ बड़ी संख्या में थे, इस कारण इस क्षेत्र को काम्यक वन कहा जाता था। बाद में यह नाम घिसकर कामां रह गया। राजस्थान हिस्ट्री डॉट कॉम से प्राप्त जानकारी के अनुसार कामां के चौरासी खम्भा मंदिर का पुराणों में विष्णु मंदिर के रूप में उल्लेख हुआ है। कामाँ ब्रजभूमि के चौरासी कोस के घेरे में स्थित है तथा भगवान श्रीकृष्ण की क्रीड़ास्थली है। कामां पर मथुरा के राजा शूरसेन का शासन रहा। इस मंदिर से गुर्जर प्रतिहार शासकों का एक शिलालेख मिला है जिसमें प्रतिहार शासकों की वंशावली दी गई है। मंदिर के एक स्तम्भ पर उत्कीर्ण लेख में कहा गया है कि शूरसेन वंश
के दुर्गगण की पत्नी वच्छालिका ने एक विष्णु मंदिर बनवाया। इस मंदिर की कुछ मूर्तियां मथुरा के संग्रहालय में रखी हुई हैं। जब अफगास्तिान से आए मुसलमानों ने इस क्षेत्र पर आक्रमण किया तो उन्होंने इस क्षेत्र के अनेक मंदिरों को तोड़ दिया। उन्होंने कामाँ के विष्णु मंदिर पर भी आक्रमण किया तथा इस मंदिर की मूर्तियों को तोड़कर इसे मस्जिद बना लिया। बाद के किसी समय में हिन्दुओं ने फिर से अपना मंदिर प्राप्त कर लिया किंतु हिन्दुओं ने इस मदिर में कोई विग्रह स्थापित नहीं किया। यही कारण है कि वर्तमान समय में चौरासी खम्भा मंदिर में भगवान विष्णु का अथवा किसी अन्य देवी-देवता का कोई विग्रह नहीं है। चौरासी खम्भा मंदिर के खम्भों पर नवग्रह, विष्णु एवं उनके अवतार तथा शिव-पार्वती विवाह आदि प्रसंग उत्कीर्ण हैं।

