जनवरी की अत्यधिक सर्दी और दिगम्बर सन्तों की अभूतपूर्व साधना – संजय जैन बड़जात्या
संवाददाता मनमोहन गुप्ता भरतपुर
इसे भी पढ़ें (Read Also): वन शहडोल रन शहडोल” मैराथन को लेकर शहर में उमड़ा जोश, तैयारियां चरम पर
डीग – अगले कुछ दिनो बाद अर्थात मकर संक्रांति को सूर्य देव उत्तरायण होने को आतुर खड़े हैं अर्थात धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करने को सूर्य का उत्तरायण कहते हैं और इसी के साथ अत्यधिक सर्दी का दौर भी कुछ कम होने लगता है। शने शने जनवरी के अंतिम या फरवरी के प्रथम पखवाड़े तक मौसम की ठंडक कुछ कम हो जाती है। किंतु सर्दी बनी ही रहती है।वर्तमान में विशेष रूप से शीत लहर का प्रकोप जारी है। भारत के 16 राज्यों में धुंध और कोहरा छाया हुआ है। अगले कुछ दिन तक यह मौसम साफ होने की उम्मीद भी नहीं है। फिर भी अपने छोटे बच्चों का और बुजुर्गों का ध्यान रखें ठंड में घर से कम से कम उन्हें निकलने दे और पूरी तरह शरीर को ढक अत्यधिक सर्दी एक और शरीर में कंपन और धूजणी प्रारंभ कर देती है और रात्रि को दो-दो रजाइयों में नींद आ रही है,सम्पूर्ण तन को पूरी तरह से ढके रहते हैं,गर्म कपड़ों के लबादे से स्वयं को लदे रहते हैं।वहीं इस कड़ाके की ठंड में दिगंबर संतो की साधना अद्धभुत ,अतुलनीय और पूरे विश्व को अचंभित करने वाली है।जीरो डिग्री टेम्परेचर में दिगम्बर रहकर साधना रत रहते हैं। यदि विश्व में सात अजूबे हैं तो आठवां अजूबा दिगंबर संत है जिनकी साधना, संयम और तप देखते ही बनता है। पूरे विश्व में जितने भी धर्म है उन सब में तप और तपस्या के हिसाब से देखा जाए तो जैन धर्म सर्वोच्च स्तर पर है। दिगम्बर मुनिराजों की क्रिया देखकर हर जनमानस दांतो तले उंगली दबाने लगता है और मन ही मन कह उठता है धन्य हो दिगम्बर मुनिराज जो इतना कठिन तप करते हैं। शीत हो या ग्रीष्म सभी ऋतुओं में दिगंबर जैन संतो ने अपनी साधना के साथ जैनत्व का मान कायम रखे हुए हैं।

