अतुल्य भारत चेतना
संवाददाता:विश्वजीत मिश्रा
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लखीमपुर खीरी । मीडिया की सभी की जरूरत पड़ती है, चाहे कोई मुसीबत में हो या खुशी खबर के लिए पत्रकार को ही बुलाया जाता है, तब तो पत्रकार बड़े अच्छे माने जाते हैं, फिर कभी सच्चाई की खट्टी खबरें आ जाए तो पत्रकार से बड़ा कोई दुश्मन नहीं है गालियां भी लोग अपने आगे देते हैं। कुल मिलाकर यह कहें कि यदि आपके पक्ष में अच्छी खबरें सच्चाई के साथ लिखें तो दूसरे भाई कहेंगे कि पैसा मिल गया होगा इसलिए खबरें लिखा गया, वही दूसरा पक्ष यह है कि यदि आपकी खबरें सच्चाई के साथ नेगेटिव लिखा जाए प्रमाणित भी रहती है तो भी कुछ लोग कहेंगे पैसा ना मिला होगा पत्रकार को इसलिए लिखा गया है। आज के कुछ नए लोगों की बात छोड़ दीजिए उन पर मैं नहीं जाता मोबाइल वालों से अलग होकर मैं बात कर रहा हूं। हमारे नेताजी आम पब्लिक अधिकारी कर्मचारी सबकी नजर पत्रकारों पर रहती है और होना भी चाहिए, लेकिन कोई यह नहीं सोचता की पत्रकार बरसात हो, भीषण ठंड हो गर्मी में चिलचिलाती धूप हो, किसी नेता अधिकारी या पत्रिकारो के खिलाफ बोलने वाले, आज तक किसी पत्रकार को इन तीनों मौसम से बचने के लिए कभी ना रेनकोट दिया होगा, ना ही ठंड के इन दोनों कान में बांधने के लिए एक मफलर भी दिया हो कोई तो बताएं जरकिन स्वेटर की बात अलग है, गर्मी के दिनों में सफेद गमछा जिसकी कीमत मात्र डेढ़ सौ रुपए है, वह भी किसी ने दिया हो तो बताइए। खैर पत्रकार को चाहिए भी नहीं हां इतना सक्षम है, लेकिन कुछ लोग जब पत्रकारों को लेकर लिखते हैं तो लगता है कि पत्रकार से ज्यादा कोई अपराधी ही नहीं है। यहां नेता कमाते हैं अधिकारी कमाते हैं हर लोग कमाते हैं हम पत्रकार यदि एक विज्ञापन लेने जाए तो उनके सिर में दर्द होने लगता है कोई घूस नहीं मांगता, सबको रिश्वत देते हैं पत्रकार को विज्ञापन देने में भी ऐसा लगता है कि इतना गरीब हो गए हैं कि आज मेरे जेब में हजार ₹500 हो तो मैं उन्हें दे दूं। अखबार का नाता विज्ञापन से सदैव रहा है यह चाहे शासकीय स्तर पर हो या प्राइवेट, शासन भी निर्माण कार्यों को लेकर सरकार की योजनाओं को लेकर विज्ञापन देती है उस विज्ञापन की राशि शासकीय दर पर अखबार मालिक को मिलता है, हर जिलों के लोकल पत्रकार अपने जिले के नेताओं को मिलता है, हर जिलों के लोकल पत्रकार अपने जिले के नेताओं अधिकारियों का विज्ञापन तो लगाते हैं वह भी पूछ कर। जो भाई यह बोलते हैं कि पत्रकार बिकाऊ हो गए हैं ! मैं ऐसा बोलने वाले से जानना चाहता हूं की आप किस पत्रकार को बोल रहे हैं कितने में खरीद चुके हैं, बोलना आसान है लेकिन काम करना आसान नहीं है बस इतना ही कहूंगा।

