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44 साल की निष्कलंक सेवा: बिना दाग, बिना नोटिस, बिना कार्रवाई रिटायर हो रहे गुरुजी शिक्षा जगत में इतिहास रचकर सेवानिवृत्त हो रहे श्री रामकृष्ण तिवारी

शहडोल

आज जब शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठते हैं, ऐसे समय में उच्च श्रेणी अध्यापक श्री रामकृष्ण तिवारी ने ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और अनुशासन की ऐसी मिसाल पेश की है जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन गई है। वर्ष 01/09/ 1983 – 31/12/2025 में शिक्षण सेवा की शुरुआत करने वाले श्री तिवारी का 44 वर्षों का सेवाकाल पूरी तरह निष्कलंक रहा — न कोई दाग, न विभागीय नोटिस, न ही किसी प्रकार की कार्रवाई।

ग्राम निपानिया निवासी श्री रामकृष्ण तिवारी वर्तमान में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय निपानिया, ब्यौहारी में पदस्थ हैं और 31 दिसंबर 2025 को शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त हो रहे हैं। शिक्षा विभाग में इतने लंबे समय तक बिना किसी शिकायत के सेवा देना अपने आप में एक दुर्लभ उदाहरण और इतिहास माना जा रहा है।

एक दिन पहले भव्य विदाई समारोह

शिक्षा विभाग द्वारा 30 दिसंबर 2025, अर्थात सेवानिवृत्ति से ठीक एक दिन पूर्व, विद्यालय परिसर में भव्य विदाई समारोह आयोजित किया जाएगा। समारोह में शिक्षक, जनप्रतिनिधि ,छात्र, अभिभावक एवं ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित होगे

छात्रों की जुबानी – “पंडित जी जैसा कोई नहीं”

विद्यार्थियों ने भावुक होकर कहा—

“पंडित जी सिर्फ अध्यापक नहीं, बल्कि मार्गदर्शक थे। उनकी सरलता, ईमानदारी और पढ़ाने की शैली ने हमें जीवन में आगे बढ़ने की राह दिखाई। उनके पढ़ाए हुए छात्र आज विभिन्न विभागों और संस्थानों में अच्छे पदों पर कार्यरत हैं।”

शिक्षक नहीं, संस्कार गढ़ने वाले शिल्पकार

श्री रामकृष्ण तिवारी का पूरा जीवन शिक्षा और संस्कारों को समर्पित रहा। उन्होंने न सिर्फ किताबी ज्ञान दिया, बल्कि अनुशासन, नैतिकता और जिम्मेदारी का पाठ भी पढ़ाया। उनका सेवानिवृत्त होना शिक्षा जगत के लिए एक युग का अंत माना जा रहा है।

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अनिल पाण्डेय

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