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विवाह हेतु बालक की उम्र 21 एवं बालिका की उम्र 18 वर्ष होना जरूरी विद्यार्थियो को बाल विवाह के प्रति किया गया जागरूक

शहडोल जिले में बाल विवाह के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से महिला एवं बाल विकास विभाग के मैदानी कर्मचारियों द्वारा विविध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

भारत सरकार के निर्देशानुसार बाल विवाह मुक्त भारत का 100 दिवसीय अभियान के तहत शासकीय हायर सेकंडरी स्कूल धुरवार में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।

 जागरूकता कार्यक्रम में सहायक संचालक महिला बाल विकास श्रीमती संजीता भगत ने विद्यार्थियो को बाल विवाह के प्रति जागरूक करते हुए कहा कि आज भी हमारे समाज में कई जगहों पर बाल विवाह होता है जिसका दुष्परिणाम यह होता है कि कम उम्र में बच्चे गर्भवती हो जाती हैं, परिणाम यह होता है कि बच्चे न तो शारीरिक रूप से परिपक्व हो पाते हैं और न मानसिक रूप से। शासकीय योजनाओं अंतर्गत यह हैं कि, जब बाल विवाह होता है तो शासन द्वारा प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का लाभ नहीं दिया जाता है। उन्होंने बताया कि बाल विवाह कानूनन दण्डनीय अपराध है, विवाह के लिए युवक की न्यूनतम आयु 21 वर्ष तथा बालिका की 18 वर्ष होना अनिवार्य है।

  कार्यक्रम में डीएसईडब्ल्यू योजना, स्पॉन्सरशिप योजना व चाईल्ड हेल्पलाइन नम्बर 1098, महिला हेल्पलाइन नम्बर 181 के बारे में भी बताया गया। कार्यक्रम में विद्यालय की प्राचार्य श्रीमती मीना प्रजापति, श्रीमती सुमन तिवारी, श्रीमती अनीता मिश्रा, वन स्टॉप सेंटर से श्रीमती भानुप्रिया महरा केसवर्कर एवं विद्यालय के शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहें।

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अनिल पाण्डेय

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