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अब 14 साल के किशोर पर भी चलेगा मुकदमा? BJP सांसद मनोज तिवारी संसद में लाएंगे प्राइवेट बिल

नई दिल्ली। किशोर अपराधों में लगातार बढ़ोतरी के बीच एक बड़ा बदलाव होने की संभावना बन रही है। भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने किशोर न्याय प्रणाली में संशोधन करने की तैयारी कर ली है। वे संसद में एक प्राइवेट मेंबर बिल पेश करने वाले हैं, जिसमें प्रस्ताव है कि जघन्य अपराधों में ट्रायल के लिए किशोर की उम्र सीमा 17 वर्ष से घटाकर 14 वर्ष कर दी जाए।

मनोज तिवारी का तर्क है कि 15 से 17 वर्ष की आयु के बच्चों के शामिल होने वाले गंभीर अपराधों की संख्या तेजी से बढ़ी है, जिसमें हत्या, बलात्कार, गैंगवार, नशा तस्करी और वाहन चलाते समय लापरवाही के कारण मौत जैसे मामले प्रमुख हैं। उनका कहना है कि कई बार अपराधी नाबालिग होने की आड़ लेकर कानूनी सख्ती से बच निकलते हैं, और यह व्यवस्था पीड़ित परिवारों के साथ अन्याय है।

उन्होंने कहा कि कई घटनाएं देश को झकझोर चुकी हैं, जिनमें किशोर उम्र के अपराधियों ने बेहद क्रूर अपराध किए हैं, लेकिन उनकी उम्र 18 से कम होने के कारण उन्हें सख्त सजा नहीं मिल सकी। ऐसे में कानून में बदलाव की मांग लगातार उठ रही है।

यदि यह संशोधन पारित होता है तो भविष्य में 14 साल से अधिक उम्र के किशोर जो जघन्य अपराधों (Heinous Crimes) में शामिल पाए जाते हैं, उन्हें व्यस्कों की तरह ट्रायल झेलना पड़ सकता है।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रस्ताव कानून व्यवस्था को मजबूत कर सकता है, हालांकि बाल अधिकार और मनोवैज्ञानिक विकास से जुड़े संगठनों की ओर से इसका विरोध भी होने की संभावना है।

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शुभम शर्मा

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