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रईस
बाबागंज। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ संगठन मंत्री महेंद्र कपूर के मार्गदर्शन में महासंघ के प्रतिनिधि मंडल के पदाधिकारियों ने नई दिल्ली स्थिति राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के अध्यक्ष को मांग पत्र देकर शिक्षक पात्रता परीक्षा संबंधी सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय पर हस्तक्षेप करके वर्षों से कार्यरत सेवारत शिक्षकों की सेवा को सुरक्षित करने का अनुरोध किया।राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ बहराइच जिलाध्यक्ष आनन्द मोहन मिश्र ने इस बावत जानकारी देते हुए बताया है कि अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ का एक प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो पंकज अरोड़ा से नई दिल्ली में मिला।
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प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षक पात्रता परीक्षा से संबंधित माननीय सर्वोच्च न्यायालय के हालिया निर्णय में उचित हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया। उन्होंने यह भी बताया कि,सभी कार्यरत शिक्षकों के लिए उत्तीर्ण करना अनिवार्य करने संबंधी इस निर्णय से देशभर के लगभग 20 लाख शिक्षकों की सेवा निरंतरता, पदोन्नति एवं आजीविका पर संकट उत्पन्न हो गया है।पत्र के द्वारा राष्ट्रीय महामंत्री प्रोफेसर गीता भट्ट ने कहा कि अधिसूचना में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 2 (एन) के अंतर्गत कक्षा 1 से 8 तक शिक्षक के रूप में नियुक्ति के लिए आवश्यक न्यूनतम योग्यता अधिसूचना की तिथि से प्रभावी होगी।
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प्रतिनिधिमंडल में संगठन मंत्री महेन्द्र कपूर, महामंत्री प्रो गीता भट्ट, अतिरिक्त महामंत्री मोहन पुरोहित,उपाध्यक्ष पवन मिश्रा, तेलंगाना प्रांत अध्यक्ष हनुमंत राव तथा तमिलनाडु प्रांत महामंत्री कंदस्वामी सम्मिलित रहे।राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ बहराइच के जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष पंकज कुमार वर्मा,जिला महामंत्री उमेश त्रिपाठी,जिला कोषाध्यक्ष सगीर अंसारी सहित महासंघ के समस्त पदाधिकारियों ने कहा कि,कई वर्षों से कार्यरत सेवारत शिक्षकों को टी ई टी अहर्ता की अनिवार्यता से मुक्त किया जाना चाहिए।

