अतुल्य भारत चेतना
प्रमोद कश्यप
रतनपुर/बिलासपुर। माँ महामाया की धार्मिक नगरी रतनपुर में यादव समाज कल्याण समिति ने गोवर्धन पूजा का आयोजन श्रद्धा और भक्ति के साथ किया। राधा कृष्ण मंदिर के प्रांगण में संपन्न इस कार्यक्रम में क्षेत्रवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की गई। कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर मनाए गए इस पावन पर्व ने भगवान कृष्ण की लीलाओं को जीवंत कर दिया, जहां सैकड़ों श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना की। यह आयोजन न केवल यादव समाज की एकजुटता का प्रतीक बना, बल्कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और जीव दया का संदेश भी प्रसारित किया।

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गोवर्धन पूजा: कृष्ण लीला का प्रतीक और प्रकृति सम्मान
गोवर्धन पूजा हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है, जो दीपावली के अगले दिन कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। विक्रम संवत कैलेंडर के अनुसार, यह दीपोत्सव का दूसरा दिन होता है। इस पर्व को “अन्नकूट उत्सव” भी कहा जाता है, जो भगवान कृष्ण को समर्पित है। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान कृष्ण ने इंद्र देव की पूजा के बजाय गोवर्धन पर्वत की आराधना कराई, जिससे क्रोधित इंद्र ने मूसलाधार वर्षा की। तब बाल रूपी कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाकर ब्रजवासियों को बचाया। यह कथा संकट काल में प्रभु की शरण और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है।

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त्योहार का संदेश स्पष्ट है—मानव जाति और जीव-जंतु प्रकृति माता पर निर्भर हैं। हमें उनके आशीर्वादों के लिए कृतज्ञ होना चाहिए। गोवर्धन पूजा के अनुष्ठान विविध हैं: गोबर से गोवर्धन पर्वत का प्रतीक बनाकर फूलों से सजाना, जल, धूप, फल और नैवेद्य अर्पित करना। गाय-बैल का सम्मान, विश्वकर्मा भगवान की पूजा (मशीनों पर आरती), अन्नकूट भोज और पर्वत परिक्रमा प्रमुख रस्में हैं। कुछ क्षेत्रों में अग्नि, इंद्र और वरुण देव की भी आराधना की जाती है। मथुरा के गोवर्धन पर्वत पर लाखों भक्त परिक्रमा करते हैं, जो भक्ति का अनुपम दृश्य प्रस्तुत करता है।
रतनपुर में भव्य आयोजन: यादव समाज की एकजुटता
रतनपुर के राधा कृष्ण मंदिर प्रांगण में आयोजित इस कार्यक्रम में यादव समाज के सदस्यों ने पूजा-अर्चना पंडित अश्विनी दुबे के संपूर्ण विधि-विधान से की। गोबर से गोवर्धन पर्वत का प्रतीक बनाकर फूलों और नैवेद्य से सजाया गया, जबकि गाय-बैल का सम्मान कर कृषि और पशुपालन के महत्व को रेखांकित किया गया। अन्नकूट प्रसाद का वितरण कर सामूहिक भोज आयोजित किया गया, जो सभी वर्गों के लिए खुला रहा।
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समिति के एक सदस्य ने बताया, “यह पूजा कृष्ण भक्ति के साथ प्रकृति संरक्षण का संदेश देती है। हमने क्षेत्रवासियों की समृद्धि और वर्षा ऋतु की कृतज्ञता के लिए प्रार्थना की।” कार्यक्रम में महिलाओं और बच्चों की सक्रिय भागीदारी ने इसे पारिवारिक उत्सव का रूप दिया। गोवर्धन परिक्रमा का प्रतीक चिन्ह वितरित कर पर्यावरण जागरूकता फैलाई गई।
प्रमुख सहभागी: समाज के गणमान्य नागरिक
कार्यक्रम में यादव समाज के प्रमुख सदस्यों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। मनबोध यादव, शिव यादव, बसंत यादव, डी.सी. यादव, कन्हैया यादव, राजा यादव, देवनारायण यादव, संतोष यादव, राजेश यादव, मनोज यादव, सुनीता यादव, शीलू यादव, चमेली यादव, पूनम यादव, सपना यादव, ईश्वरी यादव के साथ सकुन गुप्ता, रामेश्वरी जैसवाल, किरण साहू, सरिता कश्यप तथा राधा सोनी उपस्थित रहीं। बड़ी संख्या में यादव समाज के लोग और नगर के गणमान्य नागरिकों की मौजूदगी ने आयोजन को भव्यता प्रदान की। यादव समाज कल्याण समिति के अध्यक्ष ने कहा, “गोवर्धन पूजा हमें सिखाती है कि प्रकृति का सम्मान ही सच्ची भक्ति है। हमारा समाज हमेशा सामाजिक सद्भाव और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रयासरत रहेगा।” पंडित अश्विनी दुबे ने पूजा के दौरान कृष्ण कथा सुनाई, जो श्रद्धालुओं को भावविभोर कर गई।

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प्रभाव और संदेश: प्रकृति कृतज्ञता का पर्व
यह आयोजन रतनपुर को धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध करने वाला साबित हुआ। गोवर्धन पूजा ने न केवल कृष्ण भक्ति को जागृत किया, बल्कि जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता भी फैलाई। समिति ने घोषणा की कि आने वाले वर्षों में इस पर्व को और विस्तार देकर ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाया जाएगा।

