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Kairana news; व्यक्तिगत स्वच्छता की जिम्मेदारी खुद की है लेकिन बच्चों को जागरूक करने करने की हमारी है : राकेश सैनी

अतुल्य भारत चेतना
मेहरबान अली कैरानवी

कैराना। प्राथमिक विद्यालय बदलूगढ़ में विश्व हाथ धुलाई दिवस के अवसर पर एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें बच्चों को व्यक्तिगत स्वच्छता के महत्व पर गहन जानकारी दी गई। सहायक अध्यापिका रीता चौहान ने बताया कि हाथों की गंदगी के कारण भारत में अकेले 40 हजार बच्चे संक्रमण का शिकार हो जाते हैं, जिससे उनकी मृत्यु तक हो जाती है। इस वैश्विक दिवस पर दुनियाभर में साबुन से सही तरीके से हाथ धोने की प्रेरणा दी जाती है, और स्कूलों में बच्चों को स्वच्छता आदतें सिखाई जाती हैं। प्रधानाध्यापक राकेश सैनी ने कहा, “व्यक्तिगत स्वच्छता की जिम्मेदारी खुद की है, लेकिन बच्चों को जागरूक करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।” कार्यक्रम में बाल कटाई शिविर, व्यावहारिक प्रशिक्षण और स्वच्छता किट वितरण ने बच्चों को प्रेरित किया, जो ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य जागरूकता की नई मिसाल बन गया।

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विश्व हाथ धुलाई दिवस का महत्व: संक्रमण रोकथाम की वैश्विक पहल

विश्व हाथ धुलाई दिवस हर साल 15 अक्टूबर को मनाया जाता है, जिसकी शुरुआत यूनिसेफ और वैश्विक स्वास्थ्य संगठनों ने की। इसका उद्देश्य हाथ धोने की साधारण आदत को बढ़ावा देकर डायरिया, निमोनिया और अन्य संक्रमणों को रोकना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, साबुन से हाथ धोने से बच्चों की मृत्यु दर में 40% तक कमी आ सकती है। भारत जैसे विकासशील देशों में जहां स्वच्छता सुविधाओं की कमी है, यह दिवस विशेष रूप से प्रासंगिक है। बदलूगढ़ स्कूल ने इस अवसर को ग्रामीण बच्चों के लिए व्यावहारिक बनाया, जहां आर्थिक मजबूरियों के कारण कई बच्चे स्वच्छता पर ध्यान नहीं दे पाते। कार्यक्रम में 200 से अधिक छात्रों ने भाग लिया, और स्थानीय समुदाय को भी इसमें जोड़ा गया।

सहायक अध्यापकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण: हाथ धोने से बाल सफाई तक

कार्यक्रम की शुरुआत सहायक अध्यापिका रीता चौहान ने की, जिन्होंने बच्चों को हाथों की गंदगी से होने वाले खतरों पर विस्तार से बताया। उन्होंने डेमो के माध्यम से दिखाया कि भोजन से पहले, शौच के बाद और खेलने के बाद साबुन से कम से कम 20 सेकंड तक हाथ धोना आवश्यक है। सहायक अध्यापक बिलेंद्र सिंह ने सही तरीके का प्रदर्शन किया—पानी से भीगोना, साबुन लगाना, सभी उंगलियों और नाखूनों को रगड़ना, और साफ पानी से धोना। रीता चौहान और दीपा ने बालों की सफाई पर जोर देते हुए सही कंघी करने और नियमित धोने का तरीका सिखाया। दांतों की सफाई पर चर्चा में ब्रशिंग की तकनीक, फ्लॉसिंग और मुंह धोने के टिप्स दिए गए। बच्चों ने हाथ धोने का प्रैक्टिकल सेशन किया, जहां स्कूल के हैंडवाश स्टेशन पर लाइन लग गई। रीता चौहान ने कहा, “ये छोटी आदतें बच्चों के स्वास्थ्य को मजबूत बनाती हैं। हमने उन्हें गंदे हाथों से होने वाली बीमारियों की कहानियां सुनाईं, ताकि संदेश घर तक पहुंचे।”

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प्रधानाध्यापक राकेश सैनी की पहल: बाल कटाई शिविर और गिफ्ट वितरण

प्रधानाध्यापक राकेश सैनी ने व्यक्तिगत स्वच्छता को व्यक्तिगत जिम्मेदारी बताते हुए कहा, “हालांकि यह हर व्यक्ति का कर्तव्य है, लेकिन स्कूल का दायित्व है कि बच्चे सही दिशा में आगे बढ़ें।” इस दिशा में उन्होंने एक बाल काटने वाले को स्कूल बुलाया और जिन बच्चों के बाल बहुत लंबे थे, उनकी कटाई कराई। यह कदम न केवल स्वच्छता को बढ़ावा देता है, बल्कि बच्चों में आत्मविश्वास भी जगाता है। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित बच्चों को स्कूल की ओर से टूथपेस्ट, ब्रश और साबुन की गिफ्ट किट वितरित की गई। सैनी ने बताया, “ये सामग्रियां बच्चों को रोजाना अभ्यास करने के लिए प्रोत्साहित करेंगी। पालकों से अपील है कि घर पर भी निगरानी रखें।”

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प्रभाव और भविष्य की योजनाएं

यह कार्यक्रम बदलूगढ़ जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता क्रांति का प्रारंभ बिंदु साबित हुआ। बच्चों ने उत्साह से भाग लिया, और कई ने घरवालों को संदेश देने का वादा किया। स्थानीय पंचायत ने इसे सराहते हुए कहा कि ऐसे आयोजन ड्रॉपआउट रोकने और स्वास्थ्य सुधार में मदद करेंगे। स्कूल अब मासिक स्वच्छता साप्ताहिक आयोजित करने की योजना बना रहा है, जिसमें पालक-शिक्षक बैठकें शामिल होंगी।

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यह पहल साबित करती है कि स्कूल शिक्षा के साथ स्वास्थ्य जागरूकता का केंद्र बन सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए प्राथमिक विद्यालय बदलूगढ़ या स्थानीय शिक्षा विभाग से संपर्क करें। विश्व हाथ धुलाई दिवस की यह सफलता ग्रामीण भारत के उज्ज्वल भविष्य की ओर इशारा करती है।

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News Desk

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