अतुल्य भारत चेतना
मेहरबान अली कैरानवी
कैराना। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी श्री रामलीला महोत्सव कस्बा कैराना में बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। 14 दिनों तक चलने वाली इस रामलीला का शुभारंभ डॉक्टर सपन गर्ग और समाजसेवी नितिन गर्ग द्वारा किया गया। इस महोत्सव में रामायण की विभिन्न लीलाओं का मंचन किया जा रहा है, जो दर्शकों में भक्ति और उत्साह का संचार कर रहा है। इस बार के आयोजन में अंगद द्वारा रावण के दरबार में युद्ध का ऐलान करने वाला दृश्य विशेष आकर्षण का केंद्र रहा, जिसमें पारंपरिक कथानक को जीवंत रूप से प्रस्तुत किया गया।

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रामलीला का शुभारंभ और प्रथम दृश्य
रामलीला महोत्सव के प्रारंभ में डॉक्टर सपन गर्ग और नितिन गर्ग ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम की शुरुआत की। प्रथम दृश्य में लंका के राजा रावण को अपने दरबार में अपनी सेना के साथ बैठे दिखाया गया, जहां वे अपने यश, अहंकार और ताकत का गुणगान कर रहे थे। तभी उन्हें दूत से सूचना मिलती है कि हनुमान जी ने पूरी लंका में आग लगा दी है, जिससे चारों ओर तबाही मच गई है। इसी बीच, रामचंद्र जी नल, नील, जामवंत आदि की सहायता से सेना सहित सौ योजन के पुल को पत्थरों से तैयार कर समुद्र पार करते हैं और सुबेल पर्वत पर पहुंच जाते हैं।
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जब यह जानकारी रावण के दरबार में पहुंचती है, तो विभीषण रावण को समझाने का हर संभव प्रयास करता है, लेकिन रावण नहीं मानता और विभीषण तथा अपने पुत्र प्रहस्त को अपमानित कर दरबार से निकाल देता है। इसके बाद विभीषण राम दल में पहुंचकर रामचंद्र जी की शरण लेता है, जहां राम जी उसे लंका का अगला राजा बनाते हुए राजतिलक करते हैं।
रामेश्वरम धाम की स्थापना और युद्ध की योजना
अगले दृश्य में रामचंद्र जी पूजा-अर्चना के लिए किसी विद्वान पंडित को बुलाने का आदेश देते हैं। इस पर रावण स्वयं सीता सहित रामसेतु पर बने शिवलिंग की पूजा कराने आता है, जिसका नाम रामेश्वरम धाम रखा जाता है। पूजा संपन्न कर रावण आशीर्वाद देकर चला जाता है।
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इसके बाद राम दल के सेनापति जामवंत, नल, नील, अंगद, हनुमान और विभीषण युद्ध की योजना बनाते हैं। रामचंद्र जी उन्हें निर्देश देते हैं कि युद्ध से पूर्व रावण को एक बार फिर दूत भेजकर सचेत किया जाए। इस पर अंगद दूत बनकर रावण के दरबार में पहुंचते हैं। अहंकारी रावण और उसकी सेना नहीं मानती और अंगद से कहते हैं कि उनकी योद्धा वानर सेना को खा जाएंगे।
अंगद का दरबार में पैर जमाना और युद्ध का ऐलान
दृश्य के क्लाइमैक्स में अंगद रावण के दरबार में अपना पैर जमा देते हैं और चुनौती देते हैं कि यदि कोई योद्धा उनका पैर हिला देगा, तो वे जानकी जी को हराकर ले जाएंगे। रावण के सेनापति इंद्रजीत, मेघनाथ आदि प्रयास करते हैं, लेकिन असफल रहते हैं। क्रोधित रावण स्वयं उठकर पैर हिलाने आता है, लेकिन सर झुकाते ही उसका मुकुट नीचे गिर जाता है। अंगद अपना पैर पीछे हटाते हुए कहते हैं कि यदि सर झुकाना है, तो रामचंद्र जी की शरण में जाओ। वे मुकुट उठाकर राम दल में फेंक देते हैं और युद्ध का ऐलान कर चले जाते हैं। वापस लौटकर अंगद सारा वृत्तांत रामचंद्र जी को बताते हैं। इस मंचन ने दर्शकों को रामायण की इस प्रसिद्ध घटना से जोड़ दिया, जहां अंगद की वीरता और रावण के अहंकार का चित्रण बेहद प्रभावशाली रहा।
कलाकारों का अभिनय और उपस्थित गणमान्य व्यक्ति
रामलीला में प्रमुख भूमिकाएं निभाने वाले कलाकारों ने उत्कृष्ट अभिनय किया। राम का अभिनय सतीश प्रजापत ने, लक्ष्मण का राकेश प्रजापति ने, सीता का शिवम गोयल ने, रावण का शगुन मित्तल एडवोकेट ने, हनुमान का आशु गर्ग ने, सुग्रीव का मेघनाथ का आशीष नामदेव ने, प्रहस्त का सोनू कश्यप ने और अंगद का अनमोल शर्मा ने किया। इन कलाकारों के जीवंत अभिनय ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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इस अवसर पर रामलीला कमेटी के सचिव आलोक गर्ग, कोषाध्यक्ष संजू वर्मा, रोहित प्रमोद गोयल, डॉक्टर रामकुमार गुप्ता, अतुल कुमार गर्ग, सुशील कुमार सिंघल, शगुन मित्तल एडवोकेट, सभासद राकेश गर्ग, राकेश सिंघल, डिंपल अग्रवाल, डॉक्टर पंकज पवन जैन, अभिषेक भारद्वाज, राकेश प्रजापत, राजेश नामदेव, पुनीत कुमार गोयल, अभिषेक भारद्वाज, मनोज कुमार मित्तल, सोनू नेता, अभिषेक गोयल, विजय नारायण, अनिल गोयल, सुनील कुमार टिल्लू, आशीष सैनी, अनमोल शर्मा, अमन गोयल, विराट नामदेव, सुशील सिंघल, आशीष नामदेव, शिवम गोयल, अभिषेक गोयल, अश्विन सिंघल, नरेश सचिन शर्मा आदि मौजूद रहे।
सुरक्षा और व्यवस्था
कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा की दृष्टि से चौकी प्रभारी किला गेट विनोद कुमार राघव के नेतृत्व में भारी पुलिस बल तैनात रहा। पालिका की ओर से विशेष सफाई व्यवस्था की गई, जिसमें कली चुने आदि की सुविधा उपलब्ध कराई गई। इन व्यवस्थाओं ने आयोजन को सुचारू रूप से संपन्न होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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यह रामलीला महोत्सव न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि समुदाय को एकजुट करने और सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने में भी सहायक सिद्ध हो रहा है। आने वाले दिनों में अन्य लीलाओं का मंचन दर्शकों को रामायण की शिक्षाओं से अवगत कराएगा।

