Breaking
Sun. Jan 11th, 2026

Environmental news; ‘फल का एक भी बीज बेकार न जाए’, बरसात में बीज बोकर पर्यावरण संरक्षण की अनूठी पहल

अतुल्य भारत चेतना
मेहरबान अली कैरानवी

बरसात का मौसम पर्यावरण संरक्षण के लिए एक सुनहरा अवसर लेकर आया है। इस मौसम में प्रकृति प्रेमियों और जागरूक नागरिकों द्वारा एक अनूठी मुहिम शुरू की गई है, जिसका नारा है- “फल का एक भी बीज, गुठली बेकार न जाए।” इस अभियान के तहत लोगों से अपील की जा रही है कि वे अपने द्वारा खाए गए फलों जैसे आम, जामुन, लीची, अमरूद आदि की गुठलियों और बीजों को फेंकने के बजाय इकट्ठा करें और उन्हें सड़क किनारे, पार्कों, या जंगलों में बो दें। यह छोटा-सा प्रयास भविष्य में विशाल वृक्षों के रूप में धरती को हरा-भरा बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

इसे भी पढ़ें : पतंजलि की डिजिटल कृषि पर रिसर्च: किसानों के लिए फायदेमंद, उत्पादन में इजाफा

अभियान का उद्देश्य और महत्व

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना और वृक्षों की अंधाधुंध कटाई के कारण हो रहे पर्यावरणीय नुकसान को कम करना है। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, हर दिन लाखों पेड़ कट रहे हैं, जिससे जलवायु परिवर्तन, मिट्टी का कटाव, और जैव विविधता का ह्रास हो रहा है। बरसात का मौसम पौधरोपण के लिए सबसे उपयुक्त समय है, क्योंकि इस दौरान बीजों को प्राकृतिक रूप से पानी और पोषण आसानी से उपलब्ध हो जाता है। इस अभियान के तहत लोग अपने दैनिक जीवन में छोटे-छोटे प्रयासों से पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे सकते हैं।

इसे भी पढ़ें : भारत में नॉन एल्कोहल सॉफ्ट ड्रिंक्स का बाजार विश्लेषण और व्यवसाय के अवसर

अभियान के समर्थक कहते हैं, “हर फल का बीज एक संभावित वृक्ष है। यदि हम इन बीजों को बेकार फेंकने के बजाय धरती में बो दें, तो हम भविष्य में हरे-भरे जंगल और स्वच्छ पर्यावरण का निर्माण कर सकते हैं।” यह मुहिम न केवल पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा देती है, बल्कि समाज के हर वर्ग को इसमें शामिल होने के लिए प्रेरित करती है।

कैसे करें बीज रोपण?

इस अभियान में भाग लेना बेहद आसान और प्रभावी है। लोग अपने द्वारा खाए गए फलों की गुठलियों और बीजों को निम्नलिखित तरीकों से उपयोग कर सकते हैं:

इसे भी पढ़ें : स्किल को बेहतर बनाने वाले रोजगार परक कोर्स और आय की संभावनाएं

  • बीज संग्रह करें: आम, जामुन, लीची, अमरूद, या अन्य फलों की गुठलियों को खाने के बाद एक पन्नी या कागज के लिफाफे में इकट्ठा करें।
  • उपयुक्त स्थान चुनें: सड़क किनारे, पार्क, खाली जमीन, या जंगल जैसे क्षेत्रों में इन बीजों को बोने के लिए स्थान चुनें।
  • बीज बोएँ: गुठलियों को जमीन में हल्का-सा दबाएँ, ताकि वे मिट्टी में स्थिर हो जाएँ। बरसात का पानी इन बीजों को अंकुरित करने में मदद करेगा।
  • यात्रा के दौरान योगदान: यदि आप ट्रेन या सड़क मार्ग से यात्रा कर रहे हैं, तो जंगल या खुली जगहों पर बीज फेंक सकते हैं, जिससे वे प्राकृतिक रूप से अंकुरित हो सकें।

इस प्रक्रिया में किसी विशेष संसाधन या लागत की आवश्यकता नहीं है, जिससे यह हर व्यक्ति के लिए सुलभ और व्यावहारिक है।

इसे भी पढ़ें : बाबा नीम करौली: कैंची धाम का बुलावा, प्रेरणादायक संदेश और चमत्कार

सामुदायिक और पर्यावरणीय प्रभाव

यह अभियान पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ सामुदायिक जागरूकता और एकता को बढ़ावा देता है। बरसात के मौसम में बोए गए ये बीज न केवल हरियाली बढ़ाएँगे, बल्कि मिट्टी के कटाव को रोकने, भूजल स्तर को सुधारने, और वायु प्रदूषण को कम करने में भी योगदान देंगे। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि एक वयस्क वृक्ष प्रतिवर्ष 20-30 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित कर सकता है और ऑक्सीजन प्रदान करता है। इस तरह, यह अभियान जलवायु परिवर्तन से निपटने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

Author Photo

News Desk

Responsive Ad Your Ad Alt Text
Responsive Ad Your Ad Alt Text

Related Post

Responsive Ad Your Ad Alt Text